बीसलपुर रोड स्थित चर्चित हेलो कैफे एंड बार के संचालक की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। करोड़ों रुपये की लोन बकाएदारी में फंसे कारोबारी पर अब 60 लाख रुपये हड़पने और 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप लगा है।
बरेली। बीसलपुर रोड स्थित चर्चित हेलो कैफे एंड बार के संचालक की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। करोड़ों रुपये की लोन बकाएदारी में फंसे कारोबारी पर अब 60 लाख रुपये हड़पने और 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप लगा है। थाना बारादरी पुलिस ने कारोबारी की तहरीर पर आरोपी रजत अग्रवाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अलखनाथ रोड स्थित उर्मिला कॉटेज निवासी पीलीभीत बायपास रोड स्थित स्पर्श लॉन के मालिक कारोबारी शिव कुमार अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उन्होंने बीसलपुर रोड स्थित आशीष रॉयल टॉवर के डी-4 फ्लैट को खरीदने के लिए कारखा इंटरप्राइजेज के संचालक रजत अग्रवाल से 60 लाख रुपये में सौदा तय किया था। आरोप है कि सौदे के तहत 30 लाख रुपये नकद और 30 लाख रुपये बैंक खाते के जरिए आरोपी को दिए गए। पीड़ित का कहना है कि पूरी रकम लेने के बाद आरोपी लगातार बैनामा टालता रहा। कई बार तारीख देने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इससे उन्हें शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है।
पीड़ित कारोबारी के मुताबिक 20 अप्रैल को जब उन्होंने फ्लैट का बैनामा कराने का दबाव बनाया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी तो आरोपी भड़क उठा। आरोप है कि रजत अग्रवाल ने गालीगलौज करते हुए कहा कि अगर रजिस्ट्री करानी है तो अब 10 लाख रुपये और देने पड़ेंगे। यही नहीं, विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। इसके बाद पीड़ित सीधे थाना बारादरी पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की।
थाना बारादरी पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी रजत अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी और रंगदारी मांगने समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रेमनगर इलाके में एक डॉक्टर के नोटबंदी के दौरान करीब एक करोड रुपए हड़पने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था। इसकी शिकायत प्रेमनगर थाना पुलिस से की गई थी। कई दिन तक पंचायत चलती रही क्योंकि मामला रिश्तेदारी का था और दिए गए एक करोड रुपए का कोई हिसाब नहीं था। इनकम टैक्स से बचने के लिए डॉक्टर ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई। इसकी वजह से रजत अग्रवाल उस समय कार्यवाही से बच गए थे।