लव जिहाद और गौ रक्षा के नाम पर फैलाई जा रही साम्प्रदायिकता पर रोक लगाने की मांग
बरेली। आला हजरत के 99वें उर्स के मौके पर ऑल इंडिया जमात रज़ा ए मुस्तफा, तंजीम उलेमा ए इस्लाम और रज़ा एकेडमी की एक विशेष बैठक हुई। जिसमें देश के मुसलमानों के आर्थिक, शैक्षिक व सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए गहन विचार विमर्श के बाद तय पाया कि एक राष्ट्रीय एजेंडा जारी कर राष्ट्रपति को प्रेषित किया जाए। ये बैठक मौलना असजद रज़ा खान की सरपरस्ती में हुई और बैठक की अध्यक्षता रज़ा एकेडमी मुम्बई के चेयरमैन मौलना सईद नूरी ने की तथा संचालन जमात के महासचिव मौलना शहाबुद्दीन ने किया।
एजेंडा के बिंदु तैयार करने के बाद जमात के सचिव नाजिम बेग को एजेंडा जारी करने को कहा गया।
1- एजेंडे में विशेष रूप से कहा गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में सरकारों का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2- देश में लव जिहाद और गौ रक्षा के नाम पर फैलाई जा रही साम्प्रदायिकता को रोकने के लिए उचित कार्रवाई हो।
3- मदरसों को आरोपों से बचाने के लिए केंद्रीय मदरसा बोर्ड बनाया जाए जिसका प्रतिनिधित्व मुस्लिम स्वयं करें।
4- बंगाल,दिल्ली एवं हरियाणा सरकार की तरह अन्य प्रदेशों में भी मस्जिद के इमामों का वेतन व व्यवस्थाएं वक्फ बोर्ड के द्वारा की जाए।
5- केंद्रीय हज कमेटी,केंद्रीय वक्फ काउंसिल, प्रदेश की हज कमेटी व उर्दू कमेटियों में 80 प्रतिशत सुन्नी बरेलवियों को प्रतिनिधित्व दिया जाए।
6- उत्तर प्रदेश में नए आदेशों के तहत मदरसों में डर का माहौल है इस लिए सरकार अपनी नीतियों को मदरसों पर न थोपे संविधान में अपनी धार्मिक शिक्षा के मदरसे स्थापित करने और उन्हें चलाने की स्वतंत्रता पूर्व में दी गई है।जिस प्रकार संस्कृत पाठशालाओं को है।मदरसों को डिजिटल रजिस्ट्रेशन से अलग रखा जाए।पोर्टल में रजिस्ट्रेशन के नाम पर सरकार के कर्मचारी मोटी रकम ले रहे है इसे बंद किया जाए।
7- बिहार राज्य में पिछले 10 सालों से मदरसों की मान्यता बन्द कर रखी है और उत्तर प्रदेश में दो साल से बन्द है इन प्रदेशों में फौरन मंजूरी की प्रक्रिया शुरू हो।
8- मीटिंग में तय पाया कि कश्मीर और अरुणांचल प्रदेश हिंदुस्तान का अटूट हिस्सा है इस पर विदेशी दबाव कबूल नही किया जाएगा। कश्मीर समस्या न गोली से न गाली से बल्कि बातचीत से हल हो।हम आतंकवाद के खात्मे की हिमायत करते है और दहशतगर्दी के खिलाफ मुहिम चलाएंगे।
बैठक में मौलना उस्मान गनी बापो, मौलना मजहर इमाम, मुफ़्ती अशफाक हुसैन , कारी सगीर अहमद, मौलाना सखी खान, खलील रज़वी, जाहिद रज़ा, फारूक आलिम, मौलना वजीर। आजम कादरी मौजूद रहें।