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बरेली में आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी कार्ड बनाकर कराए ऑपरेशन, सीएमओ से शिकायत

आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुराना शहर की रहने वाली एक महिला ने सीएमओ से शिकायत कर आरोप लगाया है कि बरेली में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर निजी अस्पतालों में इलाज और ऑपरेशन कराने वाला पूरा गैंग सक्रिय है।

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May 11, 2026

बरेली। आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुराना शहर की रहने वाली एक महिला ने सीएमओ से शिकायत कर आरोप लगाया है कि बरेली में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर निजी अस्पतालों में इलाज और ऑपरेशन कराने वाला पूरा गैंग सक्रिय है। शिकायत में रिटायर्ड शिक्षक समेत पांच लोगों के नाम सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

सूफी टोला निवासी नेहा परवीन ने सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि जगतपुर की गुलिस्ता कॉलोनी निवासी मोहम्मद जावेद, नेहा रानी और जहाजेब अंसारी मिलकर फर्जी आयुष्मान कार्ड तैयार कराने का काम करते हैं। महिला का दावा है कि इस गैंग ने कई लोगों के नाम, पता और पहचान बदलकर सरकारी योजना का फायदा उठाया।

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रिटायर्ड शिक्षक के आंख के ऑपरेशन पर सवाल

शिकायत में सबसे बड़ा आरोप रिटायर्ड शिक्षक बाबू अंसारी के इलाज को लेकर लगाया गया है। महिला का कहना है कि बाबू अंसारी का आंख का ऑपरेशन फर्जी दस्तावेजों के जरिए कराया गया। आरोप है कि इलाज के दौरान दूसरे राज्य और दूसरी पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी भुगतान लिया गया। शिकायत में आधार नंबर और बैंक खाते तक का जिक्र किया गया है। महिला ने आरोप लगाया कि नसरीन बेगम नाम की महिला का आयुष्मान कार्ड बिहार का दिखाया गया, जबकि इलाज बरेली के निजी अस्पताल में कराया गया। शिकायत के मुताबिक सात मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया, नौ मार्च को ऑपरेशन हुआ और 11 मार्च को डिस्चार्ज कर दिया गया। आरोप है कि पूरे इलाज का पैसा सरकारी योजना से निकाला गया।

सरकार के साथ धोखाधड़ी

शिकायतकर्ता ने इसे उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सीधी धोखाधड़ी बताते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। मामले में मोहम्मद अंसारी, नेहा रानी, जहाजेब अंसारी, बाबू अंसारी और नसरीन बेगम के नाम दिए गए हैं। सीएमओ कार्यालय तक शिकायत पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही मिले तो संबंधित लोगों और अस्पताल पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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