बरेली

दोषी नहीं, फिर भी 24 साल जेल में काटा, हाई कोर्ट ने किया दोषमुक्त, जानें आजाद खान की कहानी

Not guilty, yet served 24 years in prison मैनपुरी निवासी आजाद खान को अदालत में सन 2001 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 2025 में हाई कोर्ट ने उसे दोषमुक्त घोषित किया। इसके बाद भी उसकी रिहाई नहीं हो पाई। एक सामाजिक संस्था के सहयोग से आजाद खान जेल से आजाद हुआ।
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Updated: 23 Jan 2026, 3:53 PM IST
जेल से रिहा किया गया आजाद खान फोटो सोर्स- 'X' वीडियो ग्रैब बरेली जिला कारागार
फोटो सोर्स- 'X' वीडियो ग्रैब बरेली जिला कारागार

Not guilty, yet served 24 years in prison मैनपुरी में 26 साल पहले डकैती की घटना हुई थी। जिसमें गिरफ्तार आरोपी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। 19 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने उसे दोषमुक्त घोषित कर दिया। पुलिस हाई कोर्ट में साक्ष्य नहीं दे पाई। दोषमुक्त होने के बाद भी आजीवन कारावास की सजा काट रहे आरोपी को जेल से रिहा नहीं किया जा सका। क्योंकि उसने सीआरपीसी की धारा 437 'ए' की औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया। एक सामाजिक संगठन की मदद से आरोपी की औपचारिकताएं पूरी की गईं, जिसके बाद उसे रिहा किया जा सका। मामला मैनपुरी का है। फफफ सन 2000 में हुई थी डकैती की घटना।

मैनपुरी की घटना

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी निवासी आजाद खान को उसके उस कर्म की सजा दी गई। जिसे उसने किया ही नहीं था। दरअसल सन 2000 में हुई डकैती के आरोप में आजाद खान को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने आजाद खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। ‌19 दिसंबर 2025 को बरेली जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आजाद खान के पक्ष में अदालत में निर्णय सुनाया। न्याय न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आजाद खान को दोषमुक्त घोषित किया। बताया गया कि आजाद खान के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला।

रिहा होने की औपचारिकताएं नहीं पूरी कर पाया

हाई कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद भी आजाद खान को बरेली के जिला कारागार से रिहा नहीं किया जा सका क्योंकि वह सीआरपीसी की धारा 437 की एक भी औपचारिकता पूरी करने की स्थिति में नहीं था। इसकी जानकारी सामने आने के बाद सामाजिक संगठन में छोटी सी आशा ने आजाद खान की औपचारिकताओं को पूरा करने का निश्चय किया और ₹7000 के जुर्माने के साथ जमानत की भी व्यवस्था की। इसके बाद बरेली जेल प्रशासन ने आजाद खान को रिहा किया।

सामाजिक संस्थान ने रिहा होने में की मदद

हाई कोर्ट से दोष मुक्त होने के बाद भी नहीं हुई रिहा आजाद खान को बरेली के जिला कारागार से रिहा नहीं किया जा सका। क्योंकि वह सीआरपीसी की धारा 437ए की औपचारिकताएं पूरी करने की स्थिति में नहीं था। इसकी जानकारी सामने आने के बाद सामाजिक संगठन 'छोटी सी आशा' ने आजाद खान की औपचारिकताओं को पूरा करने का निश्चय किया और 7 हजार के जुर्माने के साथ जमानत की भी व्यवस्था की। इसके बाद बरेली जेल प्रशासन ने आजाद खान को रिहा किया।

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23 Jan 2026, 3:53 PM IST
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