
बरेली। दलितों के भारत बंद के बाद सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को सवर्णों और पिछड़े वर्ग की तरफ से भारत बंद का आह्वान किया गया है। इस अवसर पर सिविल लाइंस हनुमान मंदिर से शांति मार्च निकाला गया। जातिगत आरक्षण के विरोध में निकाले गए इस शांति मार्च में काफी तादाद में लोग शामिल हुए। रामराज्य जन कल्याण सेवा मंच के तत्वाधान में निकाला गया ये शांति मार्च हनुमान मंदिर से शुरू होकर कलेक्ट्रेट पर समाप्त हुआ जहां पर संगठन ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
आरक्षण में बदलाव की मांग
शांति मार्च में शामिल अखिल भारतवर्ष ब्राह्मण सभा के कौशल सारस्वत ने कहा कि हम लोगों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेज कर देश से जातिवाद खत्म करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि आरक्षण रेवड़ियों की तरह बांटा जा रहा है। जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर आर्थिक रूप से मजबूत हो गए हैं, उनके बच्चे भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। जबकि आरक्षण का फायदा गरीब, विकलांग, पूर्व सैनिक के आश्रितों और अनाथ लोगों के लिए होना चाहिए।
पुलिस के साए में निकला मार्च
शांति मार्च में तमाम संगठन शामिल हुए। शांति मार्च के दौरान कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए काफी तादाद में पुलिस फोर्स भी तैनात किया गया था जो शांति मार्च के दौरान साथ साथ रहा।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर रामराज्य जन कल्याण समिति की अध्यक्ष निकिता अग्रवाल, सचिव पंडित कृष्ण मुरारी शर्मा, उपाध्यक्ष विवेक शर्मा, हिन्दू समाज कल्याण समिति के शिव कुमार बरतरिया, हिन्दू जागरण एकता समिति से मनोज सक्सेना, शिव सेना से दीपक पाठक, श्रीमद भगवत गीता समिति से आचार्य संजीव गौड़, नाथ नगरी सेवा समिति से गौरव सक्सेना, अखिल भारतीय समानता मंच से सूर्य अग्निहोत्री, अखिल भारतीय भारतवर्ष ब्राह्मण सभा से गजेंद्रपाल, कौशल सारस्वत समेत तमाम सामाजिक लोग भी शांति मार्च में शामिल हुए।