बरेली

नदी-नहर की करोड़ों की जमीन कब्जाने वालों को प्रशासन का अभयदान

अगर ईमानदारी से भूमाफिया की सूची बनती तो बड़े भूमाफिया सूची में होते लेकिन अफसरों ने सियासी दवाब और दोस्ती के चक्कर में ऐसा नहीं किया।

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Dec 15, 2017

बरेली। सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद प्रशासन ने भूमाफियाओं की सूची शासन को भेज दी है। जिले के टॉप 10 भूमाफियाओं में एक भी शहर का नहीं है। प्रशासन की लिस्ट में ग्रामीण इलाके के भूमाफिया शामिल हैं जबकि शहर में नहरों, नदी और नगर निगम की जमीन पर कब्जा करने वाले एक भी बड़े भूमाफिया का नाम लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है जबकि शहर में नदी और नहर की जमीन पर कब्जा कर बिल्डरों ने कॉलोनियां खड़ी कर दीं और मकान बेच दिए।अगर ईमानदारी से भूमाफिया की सूची बनती तो शहर के ये भूमाफिया सूची में होते लेकिन प्रशासन के अफसरों ने इन भूमाफियाओं को सियासी दवाब और दोस्ती के चक्कर में लगातार अभयदान देता रहा है और जो इस सरकार में भी जारी है।

प्रशासन के टॉप 10 भूमाफिया

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आंवला के रोहतापुर गांव के तीन भाई जनरैल सिंह, सतनाम सिंह और भगवान सिंह का नाम प्रशासन ने भू फामिया के रूप में चिन्हित कर शासन को भेजा है। जनरैल सिंह और उनके भाइयों से 95.85 लाख की जमीन भी मुक्त कराने की बात कही गई है। इनके ऊपर सिरौली थाने में मुकदमा भी दर्ज है।

तहसील मीरगंज के गोराहेमराजपुर मजरा गोरा लोकनाथपुर के विजेंद्र सिंह ने 58.95 लाख की सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है और इन पर राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई भी की गई है। इसे लेकर न्यायालय में वाद लंबित है।

तहसील सदर के गुजराही गांव के वीरेंद्र सिंह का नाम भूमाफियाओं की सूची में है। इन पर 46.20 लाख की सरकारी जमीन कब्जा करने का आरोप है।

आंवला के राजपुर गांव के सत्यपाल का नाम भी भूमाफिया की सूची में है। इन पर 23.94 लाख की सरकारी जमीन कब्जा करने का आरोप है। राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत इन पर भी कार्रवाई की गई है।

सदर तहसील के मुड़िया चेतराम के छत्रपाल सिंह को भी प्रशासन ने भूमाफिया घोषित किया है। इन पर 22.02 लाख की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप है। इन पर भी राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई की गई है।

सदर तहसील के हैवतपुर के विनोद कुमार भी भूमाफिया की सूची में शामिल हैं। विनोद पर 21.99 लाख की जमीन कब्जाने का आरोप है। इन पर भी राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई हुई है।

बहेड़ी तहसील के जमीर और अब्दुल खलीक भी भूमाफिया की सूची में शामिल है। इन पर 21.15 लाख की जमीन कब्जाने का आरोप है। दोनों के खिलाफ मुकदमा भी कायम है।

तहसील सदर के नौगवां घाटमपुर के बाबू, घासीराम ,मुकंदी, बाबूद्दीन, श्री कृष्ण , सुंदरलाल, पोथीराम और मंगलीराम भी भूमाफियों की सूची में है और इन पर 19.74 लाख की सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप है।

सदर तहसील के सूदनपुर गांव के नारायणदास भी भूमाफिया की सूची में है। इन पर 15.48 लाख की सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप है।

बहेड़ी के मुनीश कुमार का नाम भी भूमाफिया की सूची में हैं। इन पर 15 लाख की सरकारी संपत्ति कब्जाने का आरोप है। इनके ऊपर 3/4 लोक सम्पत्ति अधिनियम की धारा 17 के तहत एफआईआर दर्ज है।

शहर में यहां है कब्जे

शहर में मिनी बाईपास के किनारे किला नदी पर पीलीभीत बाईपास के पास बहने वाली नकटिया नदी पर जमकर कब्जे हुए हैं लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है सबसे ज्यादा तो सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जा हुआ है यहां पर 1962-63 के दौरान शारदा कैनाल से रजवाह बरेली के नाम से ब्रांच नहर रिछा से निकाली गई थी। इससे सिंचाई होती थी। 41.834 किमी. लंबी यह नहर शहर से सटे गांव पीर बहोड़ा, परतापुर, नवादा, तुलापुर होते हुए बीसलपुर मार्ग पर हरूनगला आती है। करीब 30 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा हो चुका है। नहर को पाट कर इसके ऊपर बड़ी बड़ी कालोनियां बन चुकी हैं। कालोनियों के नीचे सिंचाई विभाग की जमीन दफन हो चुकी है। हैरानी बात यह है कि नहर की जमीन पर मकान बनते रहे और अधिकारी आंख मूंद कर सब कुछ देखते रहे। बीच-बीच में तेज तर्रार जिलाधिकारियों ने कब्जा छुड़ाने की कोशिश भी की लेकिन अवैध कब्जा करने वाले रसूखदार बिल्डरों के सामने उनकी एक न चली। अब जबकि योगी आदित्यनाथ ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं तो प्रशासन ने नहर की जमीन कब्जाने वालों को भूल कर ग्रामीण इलाकों के भूमाफियों की सूची भेज कर इतिश्री कर ली।

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Published on:
15 Dec 2017 06:23 pm
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