बाड़मेर

700 साल पुराना तिलवाड़ा मेला: 2.25 करोड़ का स्टेडियम फाइलों में कैद, रेत पर बैठकर घुड़दौड़ देखने को मजबूर हजारों लोग

Barmer Cattle Fair Ground: तिलवाड़ा मेले में प्रस्तावित स्टेडियम तीन साल बाद भी फाइलों में अटका है। 2.25 करोड़ की योजना जयपुर में लंबित होने से निर्माण शुरू नहीं हो सका।
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Mar 21, 2026
700-Year-Old Tilwara Fair Barmer 2.25 Crore Stadium Stuck in Files Watch Horse Races Sitting on Sand
तीन साल पहले बना प्रस्ताव, 2.25 करोड़ में बनना था स्टेडियम, अटक गया जयपुर जाकर (फोटो- पत्रिका)

Tilwara Cattle Fair: पशु मेला मैदान में 2 करोड़ 25 लाख की लागत से बनने वाले स्टेडियम का प्रस्ताव वर्ष 2023 से अटका हुआ है। स्टेडियम निर्माण न होने से मेलार्थियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर घुड़दौड़ का रोमांच देखने के लिए दर्शकों को रेत पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है।

सात सौ वर्षों से अधिक समय से आयोजित हो रहा तिलवाड़ा पशु मेला वर्तमान में अपनी पूरी रंगत पर है। मेले में अब तक 2600 से अधिक घोड़े और 338 ऊंट पहुंच चुके हैं। यहां सायंकाल होने वाली घुड़दौड़ के समय रोमांच चरम पर होता है और हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं।

वर्तमान में यहां केवल 30 मीटर तक ही सीढ़ियां बनी हुई हैं, शेष हिस्सा नदी का बांध है। ऐसे में दर्शकों को ढलान या रेतीली जमीन पर बैठकर दौड़ देखनी पड़ती है।

वर्ष 2022 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने मेले का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया था। तब राजस्थान पत्रिका के अभियान के बाद राज्य सरकार ने मेले की महत्ता को देखते हुए इसे पुनः प्रारंभ कराया।

व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्राथमिक जरूरतों का आकलन किया गया, जिसमें स्टेडियम निर्माण को प्रमुखता दी गई। सरकार ने 2 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत से 60 मीटर अतिरिक्त सीढ़ियां, कुल 90 मीटर क्षेत्र पर टीनशेड, एक हॉल और शौचालय ब्लॉक निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया था। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने वर्ष 2023 में यह प्रस्ताव सरकार को भेज दिया था।

नई सरकार से भी आस, पर अमल नहीं

प्रस्ताव भेजे जाने के बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया। नई सरकार के बजट प्रस्तावों में भी इस कार्य को प्राथमिकता से शामिल किया गया, इसके बावजूद अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है। नतीजतन, स्टेडियम निर्माण का मामला फाइलों में ही दबा हुआ है।

क्यों आवश्यक है स्टेडियम

  • मेले में लगभग 2600 घोड़े और उनके साथ 2000 अश्वपालक पहुंचते हैं।
  • प्रतिदिन लगभग 10,000 दर्शक घुड़दौड़ देखने आते हैं।
  • 15 दिवसीय मेले में कुल 2 लाख से अधिक श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं।
  • पशुपालकों के विश्राम के लिए सुरक्षित स्थान व बुनियादी सुविधाओं की दरकार है।

नया जिला, नई रूपरेखा की जरूरत

मेले का इतिहास 700 वर्ष पुराना है। पशुपालन विभाग से पूर्व यह मेला जिला प्रशासन के अधीन था, तब पशुओं की आवक और व्यवस्थाओं के लिए एक विस्तृत 'ब्लू प्रिंट' (कार्ययोजना) तैयार की जाती थी। अब बालोतरा नया जिला बन चुका है, ऐसे में मेले की उत्तरोत्तर प्रगति के लिए नई रूपरेखा तैयार करना आवश्यक है।

मेले के लिए अब ब्लू प्रिंट की दरकार

मेले का आयोजन 700 साल से हो रहा है। पशुपालन विभाग से पहले यह मेला बाड़मेर जिला प्रशासन के पास था। तब पशुओं की आवक अधिक होने के साथ ही मेले के व्यवस्थित आयोजन को लेकर ब्लू प्रिंट तैयार की जाती थी। इसके अनुसार ही मेला व्यवस्थित होता था। अब बालोतरा नया जिला बन गया है।

ऐसे में यह मेला आगे उत्तरोत्तर प्रगति करे इसके लिए विकास की ब्लू प्रिंट तैयार होनी चाहिए। स्टेडियम व अन्य सुविधाओं को लेकर प्रशासन ध्यान दें। पंद्रह दिन के मेला देशभर में प्रसिद्ध है। इस हिसाब से यहां विकास की दरकार है।
-गोपाराम पालीवाल, पूर्व सरपंच तिलवाड़ा

Updated on:
21 Mar 2026 02:33 pm
Published on:
21 Mar 2026 02:33 pm
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