बाड़मेर

आयुर्वेद का इलाज तो है पर दवाइयां ही नहीं, कैसे मिलेगी राहत

- निजी चिकित्सालयों में मरीजों का जमावड़ा उपचार को लेकर मरीजों को उठानी पड़ी परेशानी
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Updated: 7 Nov 2017, 9:04 PM IST
बालोतरा.चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के चलते सड़क दुर्घटना में घायल महिला का निजी अस्पताल में उपचार करते चिकित्सक।
बालोतरा.चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार के चलते सड़क दुर्घटना में घायल महिला का निजी अस्पताल में उपचार करते चिकित्सक।

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बालोतरा.
राज्य में चिकित्सकों की प्रदेश व्यापी हड़ताल पर मंगलवार दूसरे दिन भी शहर चिकित्सालय में चिकित्सक काम पर नहीं लौटे। आयुष व आयुर्वेद चिकित्सकों ने सेवाएं दी। इस पर उपचार के लिए नाममात्र मरीज चिकित्सालय पहुंचेे। चिकित्सालय में आयुर्वेद दवाइयां उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। शहर के निजी चिकित्सालयों में उपचार के लिए मरीजों की भीड़ उमड़ी।

प्रदेश में चिकित्सकों की राज्य व्यापी हड़ताल पर शहर व क्षेत्र में उपचार व्यवस्था बुरी तरह से लडख़ड़ा गई है। वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर मंगलवार दूसरे दिन भी नगर के राजकीय नाहटा चिकित्सालय में छह आयुष व चार आयुर्वेद चिकित्सकों ने सेवाएं दी, लेकिन उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को कोई राहत नहीं मिली। इन चिकित्सकों के सेवाएं देने के समाचार जान अधिकांश मरीज चिकित्सालय के बाहर से ही लौट गए। कुछ मरीज पहुंचे तो दवाइयों को लेकर उन्हें परेशानी उठानी पड़ी। क्योंकि आयुष व आयुर्वेद चिकित्सकों की ओर से जांच के बाद लिखी गई दवाइयां सरकारी व निजी दुकानों पर उपलब्ध जो नहीं थी। सड़क दुघर्टना में घायल एक महिला को निराश होकर निजी चिकित्सालय में उपचार लेना पड़ा। घायल महिला के चिकित्सालय पहुंचने पर उपस्थित लोगों ने चिकित्सक नहीं होने की बात कहते हुए इसे बाहर से ही लौटा दिया। वहां भी मरीजों की उमड़ रही भीड़ पर चिकित्सक परेशान दिखाई दिए। हड़ताल के चलते सोमवार को राजकीय नाहटा चिकित्सालय में उपचार के लिए 102 व मंगलवार दोपहर 12 बजे तक 14 मरीज ही पहुंचे। जबकि निजी चिकित्सालयों में मरीजों के खड़े रहने की जगह बची नहीं दिखाईदे रही थी।

दवाइयां उपलब्ध नहीं-
चिकित्सालय में चिकित्सक ने जांच बाद दवाइयां लिखी, लेकिन चिकित्सालय व बाहर की दुकानों पर इनके उपलब्ध नहीं होने पर परेशानी उठानी पड़ी। सरकार दवाइयां भी उपलब्ध करवाएं। - धर्मेन्द्र सोनी

परेशानी बढ़ गई है- चिकित्सालय के समस्त चिकित्सक दूसरे दिन भी काम पर नहीं लौटे। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए आयुष व आयुर्वेद चिकित्सकों ने सेवाएं दी। हड़ताल को लेकर परेशानी अधिक बढ़ गई है। - डॉ. बलराजसिंह पंवार, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी राजकीय नाहटा चिकित्सालय

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