बाड़मेर

राजस्थान में यहां हर दिन हो रहे ‘धमाके’, घरों में दरारें- वन्यजीव बेघर, तहसीलदार बोले- ‘मुझे नहीं पता’

राजस्थान के बालोतरा में खनन माफिया का आतंक, ललेची माता पहाड़ियों में अमोनियम नाइट्रेट ब्लास्टिंग से दहल रहे गांव। घरों में आई दरारें, वन्यजीव बेघर। तहसीलदार बोले— 'मुझे जानकारी नहीं'।

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May 17, 2026
Balotra Illegal Mining Blasting Lalechi Mata Hills Damaged Property Wildlife Endangered
Balotra Illegal Mining Blasting Lalechi Mata Hills Damaged Property Wildlife Endangered

राजस्थान का पश्चिमी अंचल इस समय एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। यह संकट कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि इंसानी लालच और खनन माफिया का फैलाया हुआ वो जाल है जो धीरे-धीरे हरी-भरी पहाड़ियों को लील रहा है। बालोतरा के प्रसिद्ध ललेची माता मंदिर से लेकर मुख्य बालोतरा रोड तक फैली पहाड़ियों में इन दिनों नियम विरुद्ध और अवैध रूप से पत्थरों का खनन धड़ल्ले से जारी है।

माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिन-रात बिना किसी अनुमति के पहाड़ों के सीने को बारूद से छलनी कर रहे हैं। इस बेतरतीब कटाई से न केवल राजस्थान की भौगोलिक और प्राकृतिक धरोहर नष्ट हो रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों का जीना भी नर्क बन चुका है।

अमोनियम नाइट्रेट के 'धमाके', हिल रही गांवों की नींव

अड्यारी भाखरी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों का आरोप है कि खदानों में पत्थरों को जल्दी और भारी मात्रा में तोड़ने के लिए प्रतिबंधित और बेहद खतरनाक केमिकल अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate) जैसे विस्फोटक पदार्थों का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा है।

दहशत की रातें: जब इन खदानों में ब्लास्टिंग की जाती है, तो कई किलोमीटर दूर तक के गांव तेज धमाकों के साथ दहल उठते हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग रात-रात भर डर के साए में जीने को मजबूर हैं।

उड़कर आ रहे मौत के पत्थर: ग्रामीणों ने बताया कि ब्लास्टिंग इतनी तेज होती है कि पहाड़ों के बड़े-बड़े तीखे पत्थर हवा में उड़कर सीधे आबादी क्षेत्रों और लोगों के खेतों तक पहुँच जाते हैं।

मकानों में आई दरारें: कई पक्के मकानों की छतें और दीवारें इन धमाकों के कंपन को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं और उनमें चौड़ी दरारें आ चुकी हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा रिहायशी मकान ढह सकता है और जनहानि हो सकती है।

आबादी क्षेत्रों में घुस रहे बेजुबान वन्यजीव

जिन पहाड़ियों में कभी प्राकृतिक वनस्पति, औषधीय पौधे और दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा हुआ करता था, खनन माफियाओं ने उन्हें गहरी खाइयों और समतल मलबे के मैदान में तब्दील कर दिया है।

अड्यारी भाखरी का विनाश: अड्यारी भाखरी क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर भूगर्भ के पाताल तक गहराई में जाकर खुदाई कर दी गई है, जिससे भूमिगत जल स्तर पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

ईको-सिस्टम फेल: लगातार हो रहे धमाकों के शोर और जहरीले धुएं के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास (Habitat) पूरी तरह नष्ट हो चुका है। पहाड़ियों पर पानी और आश्रय की भारी कमी हो गई है।

गांवों में पैंथर्स और हिंसक जीवों का खतरा: रहने की जगह न बचने के कारण सियार, लोमड़ी, पैंथर्स और अन्य जंगली जीव-जंतु अब भोजन और पानी की तलाश में सीधे इंसानी बस्तियों और गांवों की ओर भटक रहे हैं, जिससे आए दिन मवेशियों और इंसानों पर हमले का खतरा बढ़ गया है।

बिना सुरक्षा उपकरणों के खप रहे मजदूर

इस अवैध खनन उद्योग का एक और काला और मानवीय पहलू भी सामने आया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इन डेंजर-जोन खदानों में काम करने वाले स्थानीय और प्रवासी मजदूरों को ठेकेदारों द्वारा हेलमेट, बूट, सेफ्टी बेल्ट या मास्क जैसे कोई भी पर्याप्त सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) प्रदान नहीं किए जाते हैं।

पूर्व में भी इस बेतरतीब ब्लास्टिंग और चट्टानें खिसकने के कारण कई गरीब मजदूर हादसों का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं या अपाहिज हो चुके हैं। लेकिन रसूखदार खनन सिंडिकेट के मालिक पैसों के दम पर और प्रशासनिक सांठगांठ से इन मामलों को पुलिस और मीडिया तक पहुँचने से पहले ही दबा देते हैं और मृतकों के परिवारों को डरा-धमका कर शांत कर दिया जाता है।

तहसीलदार का गैर-जिम्मेदाराना बयान

क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस अवैध कारोबार को रुकवाने के लिए जिला कलेक्टर से लेकर खनिज विभाग (Mining Department) और स्थानीय प्रशासन को दर्जनों लिखित शिकायतें भेजी हैं, लेकिन आज तक धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब इस पूरे गंभीर मामले को लेकर स्थानीय जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी से जवाब मांगा गया, तो उनका बयान बेहद चौंकाने वाला और निराशाजनक था।

तहसीलदार नारायण देवासी का बयान: "इस संबंध में मुझे फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। मैं अपने हलके के पटवारी और ग्राम सेवक को मौके पर भेजूंगा और उनसे पूरी रिपोर्ट व जानकारी लेने के बाद ही इस बारे में आगे कुछ बता पाऊंगा।"

ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में दिन-रात बारूद फट रहा हो, वहां के तहसीलदार का यह कहना कि 'मुझे जानकारी नहीं है', साफ तौर पर प्रशासनिक लापरवाही या फिर माफियाओं को दिए जा रहे मौन संरक्षण की ओर इशारा करता है।

समय रहते सख्त कदम उठाना जरूरी

अगर बालोतरा के इस ललेची माता पहाड़ी क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन और खतरनाक अमोनियम नाइट्रेट ब्लास्टिंग पर तुरंत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और राजस्थान सरकार द्वारा कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो भविष्य में यह क्षेत्र किसी बड़े भूस्खलन या मानवीय त्रासदी का गवाह बन सकता है। मरुधरा के पर्यावरण और आमजन की सुरक्षा के लिए इस माफिया राज का अंत होना बेहद जरूरी है।

Updated on:
17 May 2026 10:54 am
Published on:
17 May 2026 10:51 am