बाड़मेर

Balotra: साधु देवेंद्र गिरि हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला, कुल्हाड़ी से दोनों पैर काटने वाले कातिल को उम्रकैद

Monk Murder Case: बालोतरा जिले में स्थित समदड़ी थाना क्षेत्र के बहुचर्चित जघन्य हत्याकांड में करीब सात वर्ष बाद न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया है। केस ऑफिसर योजना के तहत की गई प्रभावी पैरवी, वैज्ञानिक अनुसंधान और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर सेशन न्यायालय बालोतरा ने अभियुक्त ओम गिरि उर्फ ओमप्रकाश को आजीवन कठोर कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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Jun 26, 2026
Balotra Monk Murder Case
देवेन्द्र गिरि उर्फ जोग सिंह (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Balotra Monk Murder Case: समदड़ी थाना क्षेत्र के बहुचर्चित वर्ष 2019 के जघन्य हत्याकांड में करीब सात वर्ष बाद न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया है। 'केस ऑफिसर योजना' के तहत की गई प्रभावी पैरवी, आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर सेशन न्यायालय बालोतरा ने अभियुक्त ओम गिरि उर्फ ओमप्रकाश को आजीवन कठोर कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला?

बालोतरा के पुलिस अधीक्षक रमेश ने बताया कि 16 फरवरी 2019 को समदड़ी थाना पुलिस को ग्राम सुरपुरा स्थित धजाजाल बालाजी मंदिर के निकट एक सुनसान खेत में एक शव पड़े होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। मृतक की पहचान देवेन्द्र गिरि उर्फ जोगसिंह के रूप में की गई।

पुलिस के अनुसार, शव करीब चार-पांच दिन पुराना था और मृतक के सिर पर गंभीर चोटों के निशान थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि क्रूरता की हदें पार करते हुए शव के दोनों पैर जांघों से कटे हुए थे। इस वीभत्स हत्याकांड के कारण पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी और कानून व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी।

वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य बने दोषसिद्धि का मुख्य आधार

इस घटना के संबंध में रानीदेशीपुरा निवासी तिलोकाराम चौधरी की रिपोर्ट पर हत्या और साक्ष्य मिटाने की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की गई। पुलिस अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि घटना के समय मृतक देवेन्द्र गिरि और अभियुक्त ओम गिरि, दोनों ने साथ में शराब का सेवन किया था।

शराब पीने के दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस और विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि अभियुक्त ने पास ही रखी बैसाखी से मृतक के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद, मृतक की पहचान छिपाने और अपराध के साक्ष्य मिटाने के क्रूर इरादे से अभियुक्त ने कुल्हाड़ी से मृतक के दोनों पैर काट दिए। फिर शव को एक वाहन में डालकर सुरपुरा के सुनसान खेत में फेंक कर फरार हो गया।

चूंकि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, इसलिए पुलिस के लिए यह केस काफी चुनौतीपूर्ण था। तत्कालीन थानाधिकारी भूटाराम के नेतृत्व में पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य जुटाकर उनका वैज्ञानिक परीक्षण कराया। पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, मेडिकल साक्ष्य, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों की एक ऐसी मजबूत कड़ी तैयार की, जिसने अभियुक्त की संलिप्तता को न्यायालय में संदेह से परे साबित कर दिया।

न्यायालय का कड़ा रुख और सजा का एलान

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 'केस ऑफिसर योजना' में शामिल किया गया था और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक नेमाराम चौधरी ने प्रभावी पैरवी की। इस दौरान कोर्ट के समक्ष 23 गवाह और 74 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

दोनों पक्षों की दलीलें और सबूतों को देखने के बाद, सेशन न्यायाधीश बालोतरा एम.आर. सुथार ने अभियुक्त ओम गिरि उर्फ ओमप्रकाश को दोषी पाया। न्यायालय ने उसे निम्नलिखित धाराओं के तहत सजा सुनाई। आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कठोर कारावास और 20,000 रुपए का अर्थदंड। आईपीसी की धारा 201 (साक्ष्य मिटाना) के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और 5,000 रुपए का अर्थदंड।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय हैं। पुलिस अधीक्षक ने इस फैसले की सराहना करते हुए इसे बेहतरीन वैज्ञानिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण जांच का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।

Updated on:
26 Jun 2026 10:29 am
Published on:
26 Jun 2026 10:29 am
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