Barmer Airport: बाड़मेर एयरपोर्ट परियोजना में भूमि अधिग्रहण का सर्वे पूरा हो गया है। अब प्रशासन मुआवजा निर्धारण की तैयारी में जुटा है। 64.43 एकड़ भूमि अधिग्रहित होगी और सितंबर 2026 तक जमीन कंपनी को सौंपने का लक्ष्य है।
Barmer Airport land acquisition survey completed: बाड़मेर: लंबे समय से प्रतीक्षित बाड़मेर एयरपोर्ट परियोजना को लेकर प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने और सोशल इम्पैक्ट सर्वे पूरा होने के बाद अब प्रशासन मुआवजा गणना की तैयारी में जुटा है।
अधिकारियों के अनुसार, तय समयसीमा के भीतर भूमि अधिग्रहण कर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से 12 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत उत्तरलाई हवाई अड्डे पर नए सिविल एन्क्लेव और एप्रोच रोड निर्माण के लिए 64.43 एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई है।
इसमें बाड़मेर तहसील के चकलाणी, बेरीवाला गांव और लालाणियों की ढाणी में स्थित 62.96 एकड़ निजी खातेदारी भूमि शामिल है। इस प्रक्रिया में कुल 428 खातेदारों की भूमि अधिग्रहित की जानी है।
प्रशासनिक स्तर पर सर्वे और खसरा संबंधी रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है और फाइलें प्रक्रियाधीन है। अब अगला महत्वपूर्ण चरण भूमि का मूल्यांकन और मुआवजा निर्धारण है, जिसके बाद अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के लिए करीब 10 करोड़ रुपए की आवश्यकता रहेगी। जिला प्रशासन का कहना है कि परियोजना के लिए भूमि हैंड ओवर की समयसीमा सितंबर 2026 निर्धारित की गई है और उसी के अनुसार कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
बाड़मेर एयरपोर्ट की घोषणा वर्ष 2019 में केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत की गई थी। शुरुआती दौर में भूमि को लेकर कुछ तकनीकी अड़चनें आईं, लेकिन हाल ही में करीब 65 एकड़ भूमि पर सहमति बनने के बाद परियोजना को स्पष्ट दिशा मिली है। सोशल इम्पैक्ट सर्वे में भी इस परियोजना को क्षेत्र के लिए लाभकारी बताया गया है।
बाड़मेर देश के प्रमुख तेल और गैस उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है, जहां बड़ी औद्योगिक गतिविधियां संचालित हैं। एयरपोर्ट बनने से उद्योग, सेना, बीएसएफ, एयरफोर्स और आम नागरिकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
उद्योग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी एयरपोर्ट संचालन में यात्री भार का लगभग 30 प्रतिशत तक योगदान देने की संभावना जताई है। ऐसे में यह परियोजना न केवल बाड़मेर बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति देने वाली साबित हो सकती है।