बाड़मेर

हाथ नहीं… फिर भी शिकायत नहीं, पैर से सर्विस कर वॉलीबॉल मैदान में आग लगा रहा परसाराम, जीता देश का दिल.. वीडियो वायरल

Differently Abled Volleyball Player: आम तौर पर वॉलीबॉल एक ऐसा खेल है जिसमें हाथों की उंगलियों और कलाइयों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन परसा राम ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है।
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Jan 10, 2026
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पैर से बॉल उछालरक सर्विस करते परसाराम, फिर शॉट लगाते नजर आए... वायरल वीडियो के अंश...

Inspirational Story: राजस्थान की रेतीली धरती ने हमेशा से जांबाज योद्धा पैदा किए हैं, लेकिन आज चर्चा किसी युद्ध की नहीं, बल्कि खेल के मैदान के एक ऐसे योद्धा की है जिसने अपनी शारीरिक कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। सोशल मीडिया पर इन दिनों बाड़मेर के रहने वाले परसा राम का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देख लोग दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हैं।

बिना हाथों के 'सुपरफास्ट' गेम

वायरल हो रहे 41 सेकंड के इस वर्टिकल वीडियो में देखा जा सकता है कि परसा राम के दोनों हाथ नहीं हैं। आम तौर पर वॉलीबॉल एक ऐसा खेल है जिसमें हाथों की उंगलियों और कलाइयों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन परसा राम ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। वीडियो में वे अपने पैरों की मदद से फुटबॉल के अंदाज में बॉल को हवा में उछालते हैं और फिर इतनी सटीक 'सर्विस' करते हैं कि सामने वाले खिलाड़ी भी चकमा खा जाएं।

मैदान पर गजब की फुर्ती

मैदान पर परसा राम की फुर्ती किसी पेशेवर खिलाड़ी से कम नहीं है। बिना हाथों के शरीर का संतुलन बनाना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन परसा राम न सिर्फ संतुलन बनाते हैं, बल्कि टीम के बाकी खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पॉइंट भी जीतते हैं। नेट के करीब जाकर बॉल को डिफेंड करना हो या सटीक जगह पर प्लेस करना, परसा राम का हर शॉट उनके जज्बे की कहानी बयां करता है।

सोशल मीडिया पर मिली 'सलाम' की बौछार

जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, यह आग की तरह फैल गया। इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक पर हजारों लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं। यूज़र्स लिख रहे हैं कि "परसा राम ने साबित कर दिया कि असली ताकत शरीर में नहीं, बल्कि इंसान के इरादों में होती है।" खेल जगत के कई दिग्गजों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस वीडियो को शेयर कर परसा राम के हौसले को सलाम किया है।

दुनिया के लिए एक बड़ी प्रेरणा

परसा राम जैसे व्यक्तित्व समाज को यह सिखाते हैं कि 'दिव्यांगता' शरीर में होती है, मन में नहीं। जिस उम्र में लोग संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं, उस उम्र में परसा राम ने बिना हाथों के उस खेल को चुना जो हाथों के बिना नामुमकिन माना जाता है। उनकी यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी विफलताओं से निराश होकर बैठ जाते हैं। आज बाड़मेर का यह लाल न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल बन चुका है। परसा राम का यह जोश यह संदेश देता है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने की चाहत है, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है।

Updated on:
10 Jan 2026 11:40 am
Published on:
10 Jan 2026 11:31 am