बाड़मेर

राजस्थानः छोटी-सी ढाणी से निकली बेटी लक्ष्मी बनी थानेदार, लालटेन में पढ़ी, ऐसे हासिल किया मुकाम

Laxmi Gadveer : बाड़मेर की बेटी लक्ष्मी गढ़वीर मिसाल बन गई है। जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंगले की बेरी की छोटी-सी ढाणी मेघवालों की बस्ती की रहने वाली लक्ष्मी दलित समुदाय से बाड़मेर जिले की पहली महिला सब-इंस्पेक्टर हो गई है।

2 min read
Sep 10, 2022
laxmi gadveer

धर्मसिंह भाटी/बाड़मेर। बाड़मेर की बेटी लक्ष्मी गढ़वीर मिसाल बन गई है। जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंगले की बेरी की छोटी-सी ढाणी मेघवालों की बस्ती की रहने वाली लक्ष्मी दलित समुदाय से बाड़मेर जिले की पहली महिला सब-इंस्पेक्टर हो गई है। इस बिटिया के सब-इंस्पेक्टर बनने से सबसे ज्यादा हैरान उसकी अपनी मां धापूदेवी हुई।

लक्ष्मी के सलेक्शन पर एक रिश्तेदार ने धापूदेवी को बधाई देते हुए कहा कि लक्ष्मी अब थानेदार बन गई है तो उन्होंने तपाक से कहा-छोरी ई थानेदार? क्योंकि धापूदेवी को सच में यह पता नहीं था कि बेटियां भी थानेदार बन सकती है। पासिंग परेड के बाद लक्ष्मी सब-इंस्पेक्टर की वर्दी में कंधों पर दो तारे लगाए घर पहुंची तो मां को पक्का विश्वास हो गया कि बेटी थानेदार बन गई है।

नए संकल्प के साथ जुटी
कांस्टेबल बनने के बाद लक्ष्मी नए संकल्प के साथ पढ़ाई में जुट गई और सब-इंस्पेक्टर को अपना नया लक्ष्य बना दिया। पुलिस कांस्टेबल रहते हुए उसने बीए किया, एम ए भी कर लिया। फिर उसने पुलिस सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा पास कर ली। पांच दिन पहले ही लक्ष्मी की सब-इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग भी पूरी हो गई। पासिंग आउट परेड के बाद वह पहली बार खाकी वर्दी में घर आई और माता धापूदेवी व पिता रायचंदराम को सेल्यूट किया और सम्मानस्वरूप अपनी पिक केप बारी-बारी से माता-पिता के सिर पर रख दी। माता-पिता की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।

लालटेन में पढ़ी, पैदल स्कूल गई
लक्ष्मी की सफलता की यात्रा बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा है। पांचवीं तक की पढ़ाई उसने अपने घर के पास के विद्यालय से की, लेकिन इससे आगे की पढ़ाई के लिए वह पांच किलोमीटर दूर स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय छोटू गई। वह पैदल ही विद्यालय जाती और वापस घर आकर लालटेन की रोशनी में रात को पढ़ती। साथ ही घर व खेत खलिहान के काम में मां का पूरा हाथ बंटाती।

दसवीं के बाद पढ़ाई छूटी
दसवीं कक्षा में लक्ष्मी 65 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण हो गई, लेकिन आगे की पढ़ाई का रास्ता नहीं मिला क्योंकि नजदीक में कोई सीनियर सैकंडरी स्कूल नहीं थी। लिहाजा उसकी पढ़ाई छूट गई। दो वर्ष ऐसे ही निकल गए। अंतत: बड़े भाई मुकेश ने लक्ष्मी को पढऩे के लिए प्रेरित किया। उसने स्वयंपाठी विद्यार्थी के रूप में बारहवीं पास की। बारहवीं पास करने के बाद वर्ष 2011 में लक्ष्मी कांस्टेबल बन गई।

बहनें मेहनत करती रहे
मेरे दो भाई है। मैं इकलौती बहन हूं। मेरे भाइयों ने मेरी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया। माता-पिता ने हमेशा आशीर्वाद दिया। पढ़ाई करने वाली बहनों से कहना चाहती हूं कि वह मेहनत करती रहे, सफलता जरूर मिलेगी।
लक्ष्मी गढ़वीर, सब-इंस्पेक्टर

Published on:
10 Sept 2022 01:37 pm
Also Read
View All
Rajasthan: राजस्थान में कुदरत का अनोखा ‘चमत्कार’, भीषण गर्मी में भी 72 घंटों से नहीं पिघले ओले, ग्रामीण हुए हैरान

Ravindra Singh Bhati: श्रमिकों की बहाली की मांग को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी का आंदोलन तेज, बोले: स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला तो आंदोलन होगा बड़ा

बदलता राजस्थान : विकास की दौड़ में सबसे आगे निकला पश्चिमी राजस्थान का ये जिला, रिकॉर्ड दिनों में हासिल की बड़ी उपलब्धि

Rajasthan News: सरकार की बड़ी लापरवाही? बिना पोस्टिंग 200 तहसीलदार 5 महीने से बिना काम ले रहे सैलरी

बाड़मेर में बॉर्डर पार कर भारत में घुस आया पाकिस्तानी, 8 KM अंदर पहुंचने के बाद पकड़ा गया