- 2013 के विधानसभा चुनावों के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव का बड़ा बदलाव - कांग्रेस भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के दोनों नेताओं को मिली पटखनी
- 2013 के विधानसभा चुनावों के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव का बड़ा बदलाव
- कांग्रेस भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के दोनों नेताओं को मिली पटखनी
बाड़मेर. वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने जिले से राज्य के लिए दो स्टार प्रचारक चुने थे। कांग्रेस से हरीश चौधरी और भाजपा से जसवंतसिंह। एक साल बाद हुए लोकसभा चुनावों में दोनों स्टार प्रचारकों को हार का सामना करना पड़ा और कर्नल सोनाराम भाजपा के स्टार बन गए।
2013 के विधानसभा चुनाव में राज्य में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जारी स्टार प्रचारकों की सूची में भाजपा के कद्दावर नेता जसवंतसिंह को शामिल किया गया। जसवंतसिंह के पुत्र मानवेन्द्रसिंह को शिव से टिकट भी दिया गया था। जसवंतसिंह ने यहां भाजपा के लिए पूरा प्रचार-प्रसार किया।
विधानसभा में जीत के बाद लोकसभा चुनाव आते-आते जसवंतसिंह को पार्टी से दूर करना शुरू कर दिया। जसवंत ने बाड़मेर क्षेत्र से लोकसभा का टिकट मांगा और उनको मना कर दिया गया। कर्नल सोनाराम चौधरी को भाजपा ने टिकट दिया। जसवंतसिंह जो भाजपा के स्टार प्रचारक थे उन्होंने निर्दलीय लोकसभा का चुनाव लड़ा और हार गए।
हरीश की हालत हुई पतली
कांग्रेस ने 2013 विधानसभा चुनाव के स्टार प्रचारकों में हरीश चौधरी को शामिल किया। हरीश चौधरी विधानसभा में तो स्टार प्रचारक रहे लेकिन लोकसभा चुनावों में उनके सामने दो बड़े नेता खड़े हो गए। जसवंतसिंह निर्दलीय और भाजपा से कर्नल सोनाराम चौधरी। ऐसे में हरीश चौधरी के लिए तय हो गया कि हारना तो है
ही। वे तीसरे स्थान पर रहे और 2 लाख 70 हजार वोटों पर सिमटना पड़ा। अब वे विधानसभा के दावेदारों में हैं।
कर्नल का स्टार चमका
कर्नल सोनाराम चौधरी 2013 तक कांग्रेस में थे। उनका पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मनभेद व मतभेद रहा। तीन बार सांसद और कांग्रेस से बायतु से 2008 में विधायक रहे। वे 2013 का चुनाव भी कांग्रेस की टिकट पर लड़े लेकिन हार गए।