2 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बाड़मेर पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग: नाकाबंदी के दौरान SHO के सिर में मारी थी गोली, 11 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला

बाड़मेर की एससी-एसटी कोर्ट ने 11 साल पुराने पुलिस फायरिंग केस में दो आरोपियों को 7-7 साल की सजा सुनाई। नाकाबंदी के दौरान एसएचओ के सिर में गोली मारने के मामले में कोर्ट ने दोनों पर 50,500 रुपए जुर्माना भी लगाया।

2 min read
Google source verification
Barmer Police Firing Case

लोक अभियोजक, स्वरूप सिंह भदरू (पत्रिका फोटो)

बाड़मेर: नाकाबंदी के दौरान पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग कर थानाधिकारी के सिर में गोली मारने के 11 साल पुराने मामले में बाड़मेर की एससी-एसटी कोर्ट ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 50,500 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

विशिष्ट न्यायाधीश डॉ. सरोज सींवर की अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 21 गवाह और 35 दस्तावेज पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुरुवार को कोर्ट ने दिनेश उर्फ दिनीया और श्रीराम उर्फ संजय को सजा सुनाई।

लोक अभियोजक स्वरूप सिंह भदरू के अनुसार, 15 अप्रैल 2015 को दोनों आरोपी डोडा पोस्त से भरी पिकअप लेकर राजसमंद जिले के रेलमगरा से दिवेर की ओर जा रहे थे। सूचना मिलने पर दिवेर थाना पुलिस ने सातपालिया सर्कल पर नाकाबंदी कर रखी थी। पुलिस को देखकर आरोपी पिकअप को रिवर्स लेकर भागने लगे।

दोनों मौके से भाग निकले

नाकाबंदी तोड़कर भागने के दौरान दिनेश ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी फायर किए, लेकिन इसी दौरान आरोपियों ने पुलिस जीप पर अंधाधुंध गोलियां चलाई। एक गोली जीप का कांच तोड़ते हुए थानाधिकारी रमेश कविया के सिर में जा लगी। घटना के बाद दोनों आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

ऑपरेशन कर निकाली गई गोली

गंभीर घायल रमेश कविया को अस्पताल ले जाया गया, जहां ऑपरेशन कर उनके सिर में फंसी गोली निकाली गई। मामले में दिवेर थाने के एएसआई जगदीशचंद्र ने आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और पीडीपीपी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया। घटना के कुछ समय बाद दिनेश के खिलाफ बाड़मेर सदर थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था, जिसमें उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

इसके बाद राजसमंद पुलिस ने उसे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। आरोपियों के आग्रह पर केस को बाड़मेर ट्रांसफर किया गया, जहां एससी-एसटी कोर्ट में ट्रायल चला। सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास और 50,500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।