
बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी। फोटो: पत्रिका
बाड़मेर। राजस्थान की रेतीली धरती के नीचे छिपा कच्चा तेल राजस्थान की किस्मत चमकाने में सबसे आगे रहा है। पिछले 15 सालों में इस तेल ने राजस्थान के खजाने को कभी लबालब भर दिया, तो कभी दुनिया भर में मची उथल-पुथल के कारण इसमें कमी भी आई। राजस्थान के राजस्व में पेट्रोलियम का योगदान 2008-09 में मात्र 8.20 करोड़ रुपए से शुरू हुआ था।
इसमें जादुई उछाल 2009 में बाड़मेर-सांचौर बेसिन से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के साथ आया था। 2013-14 में इससे कमाई 5953.11 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जो अब तक की सबसे ज्यादा है। उसके बाद विभिन्न कारणों के चलते आज तक यह जादुई आंकड़ा नहीं छू सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश एक बार फिर मरुभूमि की ओर उम्मीद भरी निगाहों से टकटकी लगाए देख रहा है, क्योंकि पचपदरा रिफाइनरी खजाना भरने में बड़ी भूमिका निभाएगी। गौरतलब है कि इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री 21 अप्रेल को करने वाले थे, लेकिन 20 अप्रेल को सीयूडी में आग से उद्घाटन कार्यक्रम टल गया। फिलहाल एचपीसीएल ने दावा किया है कि मई के अंत तक ट्रायल प्रोडक्शन की तैयारी है।
सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 3200 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा, जिसमें से दिसंबर तक 1,533 करोड़ रुपए खजाने में आ चुके हैं।
1. वैट और सीजीएसटी : अभी तक राजस्थान केवल कच्चा तेल निकालता था, जिसे दूसरे राज्यों में साफ करने भेजा जाता था, लेकिन अब खेल बदलने वाला है। अब राजस्थान में ही पेट्रोल-डीजल और गैस बनेगी। जब माल तैयार होकर बिकेगा, तो वैट और राज्य वस्तु एवं सेवा कर का मोटा हिस्सा सीधे राजस्थान सरकार की जेब में आएगा।
2. पेट्रोकेमिकल हब: रिफाइनरी के साथ बनने वाला पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स अन्य उद्योगों को जन्म देगा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर सेस और अन्य औद्योगिक करों में वृद्धि होगी।
3. नए उद्योग, नई कमाई: रिफाइनरी के आसपास दर्जनों नए कारखाने खुलेंगे, जिससे सरकार को अलग से टैक्स मिलेगा।
वर्ष 2013-14 : राजस्थान ने पेट्रोलियम क्षेत्र से अब तक का सर्वाधिक 5953.11 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया। उस समय बाड़मेर से करीब 1,75,000 बैरल प्रति दिन का उत्पादन हो रहा था।
वर्ष 2015-2021 : वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी कमी और डॉलर के मुकाबले रुपए के उतार-चढ़ाव ने राजस्व पर ब्रेक लगा दिया। 2015-16 में यह गिरकर 2341.43 करोड़ रह गया।
वर्ष 2020-21: वैश्विक महामारी के कारण मांग कम होने और कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट के चलते राजस्व 1904.79 करोड़ पर सिमट गया।
| वित्तीय वर्ष | राजस्व प्राप्ति (करोड़ रुपए लगभग) |
|---|---|
| 2013-14 | 5953.11 |
| 2015-16 | 2341.43 |
| 2020-21 | 1904.79 |
| 2022-23 | 4889.17 |
| 2024-25 | 2688.91 |
| 2025-26 | 1533.74 (दिसंबर 2025 तक) |
(डेटा पेट्रोलियम विभाग, राजस्थान द्वारा वार्षिक प्रगति रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार)
Published on:
01 May 2026 06:51 am
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