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रिफाइनरी अग्निकांड अपडेट: ‘मोदी सभा स्थल’ पर अचानक फिर शुरू हुई हलचल, जानें क्या आई है लेटेस्ट अपडेट? 

Pachpadra Refinery Fire Incident | बालोतरा रिफाइनरी में 20 अप्रैल को लगी भीषण आग के बाद अब लोकार्पण स्थल पर खामोशी और हलचल दोनों साथ नजर आ रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जांच के साक्ष्य जुटाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के लिए बने विशालकाय डोम को हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।

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Pachpadra Refinery Fire Incident

Pachpadra Refinery Fire Incident

राजस्थान की 'भाग्य रेखा' कही जाने वाली पचपदरा रिफाइनरी में 20 अप्रैल की वो काली रात अब भी लोगों के जेहन में ताजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होने वाले ऐतिहासिक लोकार्पण से ठीक 24 घंटे पहले क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में लगी आग ने न केवल करोड़ों के निवेश को झुलसाया, बल्कि प्रदेश के सबसे बड़े 'उत्सव' पर भी पानी फेर दिया। अब खबर आ रही है कि सभा स्थल पर बनाए गए उन तीन विशालकाय डोमों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जहाँ से पीएम मोदी मारवाड़ की जनता को संबोधित करने वाले थे।

सबूतों की सुरक्षा के लिए थमा था काम

घटना के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर को सील कर दिया था। सभा स्थल पर खड़े डोम और अस्थायी ढांचों को हटाने पर भी तत्काल रोक लगा दी गई थी। एजेंसियों का मानना था कि डोम हटाने की प्रक्रिया में आग की घटना से जुड़े अहम तकनीकी सबूत या साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं।

  • साक्ष्यों का संकलन: पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने घटना स्थल से आवश्यक डाटा और साक्ष्य जुटा लिए हैं।
  • मशीनरी की वापसी: अब संबंधित ठेकेदारों ने क्रेन और सैकड़ों श्रमिकों की मदद से इन ढांचों को खोलना शुरू कर दिया है। अगले 2-4 दिनों में यह पूरा मैदान फिर से खाली और सामान्य नजर आएगा।

1.80 लाख लोगों के बैठने की थी तैयारी

प्रधानमंत्री की जनसभा को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। यहाँ किए गए इंतजाम किसी अचंभे से कम नहीं थे:

तीन विशाल डोम: सभा स्थल पर तीन बड़े वाटरप्रूफ डोम खड़े किए गए थे।

ब्लॉक व्यवस्था: प्रत्येक डोम में 35 ब्लॉक बनाए गए थे और हर ब्लॉक में लगभग 1700 लोगों के बैठने की क्षमता थी।

500 मजदूरों की मेहनत: इन ढांचों को खड़ा करने में 500 से अधिक श्रमिक और दर्जनों क्रेनें दिन-रात लगी थीं। अब वही हाथ नम आंखों से इसे समेटने में जुटे हैं।

    सस्पेंस: नई तारीख का इंतजार या सुरक्षा ऑडिट का घेरा?

    डोम का हटाया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या रिफाइनरी का लोकार्पण अब लंबे समय के लिए टल गया है? या फिर प्रशासन नई तारीखों के साथ नए सिरे से तैयारी करेगा?

    • तकनीकी जांच: सूत्रों के अनुसार, सीडीयू यूनिट में लगी आग की तकनीकी जांच जब तक पूरी नहीं होती, तब तक प्रधानमंत्री का दौरा दोबारा तय होना मुश्किल है।
    • जनता की नजरें: बाड़मेर, बालोतरा और पूरे पश्चिमी राजस्थान की नजरें अब केंद्र सरकार और एचपीसीएल (HPCL) के अगले फैसले पर टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है।

    तीन से चार सप्ताह में मरम्मत का दावा

    एचपीसीएल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, आग हीट एक्सचेंजर स्टैक तक सीमित रही। छह एक्सचेंजर और उनसे जुड़े उपकरण प्रभावित हुए। आग का मुख्य कारण वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से रिसाव बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, तीन से चार सप्ताह में मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

    रिफाइनरी से 1 जुलाई 2026 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के लक्ष्य को लेकर काम ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। राज्य सरकार और एचपीसीएल के संयुक्त उपक्रम एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) में 20 अप्रैल को क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू) में लगी आग के बाद अब मरम्मत कार्य तेजी से किया जा रहा है।

    आग से क्षतिग्रस्त उपकरणों को दुरुस्त करने का काम टाटा प्रोजेक्ट्स ने तेज कर दिया है। एचपीसीएल के अनुसार, आग केवल हीट एक्सचेंजर स्टैंक तक सीमित रही, जिससे 6 एक्सचेंजर और उनसे जुड़े सहायक उपकरण प्रभावित हुए।

    सूत्रों के मुताबिक, एचआरआरएल का प्रयास है कि निर्धारित समय सीमा से पहले ही एलपीजी, मोटर स्पिरिट (एमएस), हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) और नैफ्था जैसे मुख्य उत्पादों का परीक्षण उत्पादन मई के दूसरे पखवाड़े से शुरू कर दिया जाए। इससे व्यावसायिक उत्पादन की प्रक्रिया समय पर पूरी करने में मदद मिलेगी।

    लोकार्पण स्थगित होने का राजनीतिक असर

    प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को राजस्थान में आगामी चुनावों और विकास के नैरेटिव के लिए बेहद अहम माना जा रहा था। आग की घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों (Safety Norms) पर भी बहस छेड़ दी है। अब जब डोम हट रहे हैं, तो यह मरुधरा के विकास की उस 'नई तारीख' की प्रतीक्षा का प्रतीक बन गए हैं।