Ravindra Singh Bhati: बाड़मेर के गिरल लिग्नाइट माइंस में मजदूरों और ट्रक चालकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने के बाद आंदोलनकारियों ने अब संघर्ष और बड़ा करने की चेतावनी दी है।
बाड़मेर। गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों और ट्रक चालकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। मांगों को लेकर चल रहा धरना बुधवार को भी जारी रहा और प्रशासन के साथ हुई वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही। समाधान नहीं निकलने से आंदोलनकारी अब बड़े स्तर पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं। मंगलवार को मजदूरों और ट्रक चालकों ने जनआक्रोश सभा आयोजित करने के बाद कलक्ट्रेट की ओर कूच किया था। इस दौरान प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
यह वीडियो भी देखें
प्रशासन ने अगले दिन फिर से बातचीत का भरोसा दिया था, मगर बुधवार को हुई चर्चा भी निष्फल रही। इसके बाद आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई है। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि यदि जल्द उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रमिक, ट्रक चालक और ग्रामीण धरनास्थल पर डटे हुए हैं। विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी देर रात फिर से गिरल धरनास्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों के बीच मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में कंपनी से हटाए गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली, सभी कर्मचारियों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू करना और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना शामिल है। इसके अलावा श्रमिकों को नियमानुसार वेतन, बोनस और अन्य सुविधाएं देने तथा श्रम कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग भी की जा रही है।
यह वीडियो भी देखें
गौरतलब है कि मंगलवार को गिरल लिग्नाइट माइंस में आयोजित मजदूर महासम्मेलन और आक्रोश सभा के बाद हजारों मजदूरों और ट्रक चालकों ने कलक्ट्रेट की ओर कूच किया था। इसी दौरान कलक्ट्रेट परिसर में अचानक हंगामा मच गया, जब विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में खुद पर पेट्रोल उड़ेल लिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत उनके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीनी और उन्हें काबू में किया।
इस घटनाक्रम के दौरान विधायक भाटी भावुक और आक्रोशित नजर आए। वे लगातार कहते रहे, “मुझे मारो, मजदूरों को मत मारो।” अचानक हुए घटनाक्रम से पुलिस और प्रशासन में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बाद में पुलिस अधिकारियों और समर्थकों ने उन्हें संभाला और कलक्ट्रेट परिसर के भीतर ले गए।