शहर की नैसर्गिक खूबसूरती को निखारा जाए तो यहां एेसे कई स्थान हैं जो शहर की छटा को बिखेर सकते हैं लेकिन सबकुछ बिखरा हुआ है।
बाड़मेर. शहर की नैसर्गिक खूबसूरती को निखारा जाए तो यहां एेसे कई स्थान हैं जो शहर की छटा को बिखेर सकते हैं लेकिन सबकुछ बिखरा हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों की नजरें इनायत नहीं, नगर परिषद के पास कोई प्लान नहीं है और अरबों रुपए कमा रही कंपनियों की सीएसआर की राशि भी यहां नहीं लग रही। तेल का खजाना निकलने के बाद बाड़मेर को जनसुविधाओं में प्रदेश में अग्रणी होना था वह पिछड़ा है। अधिकारी भले ही लाख दावे करें लेकिन लखटकिया बात यही है कि उनके पास बाड़मेर के विकास का कोई मास्टर प्लान ही नहीं है।
बिखरी हुई खूबसूरती
शिल्पग्राम
उत्तरलाई रोड पर शिल्पग्राम की बड़ी जमीन है। यहां हाट बाजार भी है। करीब पंद्रह साल साल ये यह स्थान दुर्दशा का शिकार हो रहा है।
वैणासर तालाब
शहर का वैणासर तालाब, इससे जुड़ा हुआ पहाड़ी इलाका और इससे आगे मंदिरों की श्रृंखला है। इसमें शिवमुण्डी, सूजेश्वर, सांईधाम, महालक्ष्मी मंदिर , सच्चियाय माता मंदिर, संतोषी माता मंदिर सहित कई स्थान शामिल हैं।
सोन तालाब
शहर के एक तरफ सोन तालाब है। इसके पीछे जैन मंदिर और जगदंबा मंदिर है। गढ़ मंदिर की गोद में बसे इस स्थान पर रेलिंग लगाने, वाकिंग ट्रेक व पार्क विकसित किया जाए तो शहर का बड़ा हिस्सा यहां आकर्षित हो सकता है,लेकिन यहां ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कारेली नाडी
गडरारोड स्थित कारेली नाडी से कचरा हट चुका है। इसके सामने पहाड़ी और इसके पूरे विकास को लेकर पूर्व में यहां कार्य कर रही एक तेल कंपनी ने पूरा प्लान बनाया था लेकिन तेरह साल से वह प्लान फाइलों में कैद हो गया है।
आदर्श स्टेडियम
शहर के आदर्श स्टेडियम में पूर्व कलक्टर गौरव गोयल की ओर से सिंङ्क्षगग फव्वारे, वाकिंग ट्रेक, पार्क, जिम और पूरी सुविधाएं तय की गई। काफी हद तक सुविधाएं हैं लेकिन इसके विकास की अभी भी दरकार है।
महावीर नगर पार्क
पॉश कॉलोनी महावीर नगर में पार्क है। इसकी सुध नगरपरिषद ने नहीं ली है। एेसे में यहां पर कचरे के ढेर लगे हैं। झूले और अन्य सुविधाएं नहीं है।
कॉलेज स्टेडियम का ग्राउण्ड
राजकीय महाविद्यालय में क्रिकेट का संजय स्टेडियम बदहाली का शिकार हो रहा है। इसी ग्राउण्ड में फुटबाल मैदान को बड़ी जगह है। कॉलेज में ही बॉटनीकल पार्क बना हुआ है।
महावीर पार्क
जिला कलक्ट्रेट के सामने ही यह शहर का एकमात्र विकसित पार्क है। इस पार्क में भी फव्वारे, झूले व अन्य सुविधाओं को लेकर नियमित देखभाल नहीं हो रही है।
कुशल वाटिका
शहर में जैन कुशल वाटिका दर्शनीय स्थान बना हुआ है। यहां जैन मंदिर के साथ ही परिसर भी देखने लायक है। इसका विकास जैन समुदाय की ओर से किया गया है। कुशल वाटिका भी गर्मियों की छुट्टियों में घूमने का बेहतर स्थान है।
उत्तरलाई के मंदिर
निकटवर्ती उत्तरलाई गांव में वायुसेना के जवानों की ओर से मंदिरों की एक श्रृंखला तैयार की गई है। यहां पर प्रतिदिन गर्मियों की छुट्टियों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
शहर के आसपास है बहुत कुछ
- चौहटन का विरात्रा मंदिर
- चौहटन का नीम्बड़ी माता मंदिर
- चौहटन का वैर माता मंदिर
- सफेद आक मंदिर महाबार
- किराडू के 12 वीं सदी के मंदिर
- जूना पतरासर का पुराना बाड़मेर
- महाबार के ऊंचे रेतीले धोर
- आशापूर्णा माता का मंदिर जूना पतरासर
कौन कौन है जिम्मेदार
नगरपरिषद- नगरपरिषद के पास चौराहों,पार्क और जनसुविधाओं के स्थानों को सुधारने की कागजी योजनाएं ही हैं यहां धरातल पर तरीके से बजट खर्च नहीं हो रहा है।
यूआईटी- जिला मुख्यालय पर यूआईटी कार्य करने लगी है। यूआईटी ने अब तक कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया है।
जिला प्रशासन- प्रशासनिक अमला चाहे तो शहर का कायाकल्प कर सकता है। समुदाय,समाजसेवियों, कंपनियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही सरकारी बजट का सदुपयोग कर शहर की तस्वीर बदलने की कई योजनाएं प्रशासन के पास हैं।
एक्सपर्ट व्यू
श्मशानघाट को देख लीजिए
शहर का श्मशानघाट देख लीजिए। नगरपालिका ने ही इसका विकास करवाया है। पार्क, पक्षियों के लिए स्थान और छत्तीस कौम के लिए जो सुविधा हुई है वह सबके सामने है। काम करना चाहें तो क्यों नहीं हो सकता है। - बलराम प्रजापत, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष
समुदाय को प्रोत्साहित करने की जरूरत
समुदाय को प्रोत्साहित करने की जरूरत रहती है और विश्वास बड़ी बात है। पंद्रह साल पहले जसदेर पर एक झोंपा ही था। समाज के सारे लोगों ने साथ दिया तो आज धार्मिक पर्यटन स्थल हो गया है। स्थानों का विकास एेसे ही होता है। भावनाएं जुड़ती हैं।- स्वामी प्रतापपुरी शास्त्री
ये भी तो हुआ है
- कलेक्ट्रेट परिसर में ही एक पार्क बना हुआ है। यहां के एक सहायक कर्मचारी नरसींगराम दिल जान से जुड़ गए औैर इस एक व्यक्ति ने यहां पेड़ों की श्रृंखला बना दी।
- शहर के श्मशानघाट का विकास भवानीसिंह पार्षद और पत्रकार भूरचंद जैन ने किया। छत्तीस कौम के लोगों को इससे बड़ी सुविधा मिली है।
- शहर के जसदेर तालाब को स्वामी प्रतापपुरी शास्त्री ने विकसित किया। पंद्रह साल में यह स्थान शहर का सबसे बेहतरीन धार्मिक पर्यटन स्थल बन गया है।
- सार्वजनिक श्मशानघाट के पास ही मेघवाल समाज का अंतिम संस्कार स्थल है। यहां पर भी समाज के लोग जुटकर स्थान को संवार रहे हैं।
फैक्ट फाइल
- 15 करोड़ प्रतिदिन देते हैं क्रूड का राज्य को राजस्व
- 35 करोड़ के करीब केन्द्र सरकार को मिलता है राजस्व - 4000 करोड़ का है जिले का हर साल का विकास प्लान- 1.50 लाख है बाड़मेर शहर की आबादी - 2032 तक का बना हुआ है मास्टर प्लान