राजस्थान पत्रिका के बिटिया ञ्च वर्क के तहत बुधवार को बेटियां अपने पापा के साथ ऑफिस पहुंची। उन्होंने कार्यस्थल पर पिता के कार्य को नजदीक से जाना। बेटियां ऑफिस पहुंचकर काफी खुशी नजर आई।sp
बेटियों ने जाना कैसे होती है देश की सीमाओं की सुरक्षा
बाड़मेर. राजस्थान पत्रिका के बिटिया ञ्च वर्क के तहत बुधवार को बेटियां अपने पापा के साथ ऑफिस पहुंची। उन्होंने कार्यस्थल पर पिता के कार्य को नजदीक से जाना। बेटियां ऑफिस पहुंचकर काफी खुशी नजर आई।
बिटिया का नाम : चीया शर्मा
पिता: कमांडेट प्रदीप कुमार शर्मा
कार्यस्थल: बीएसएफ ११५ वीं बटालियन
पापा के साथ ऑफिस आकर अच्छा लगा। पापा कम्पनी कमांडेट है तो वे किस प्रकार अपने काम करते हैं, इस बारे में समझा। पापा देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने का काम करते है।
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बिटिया का नाम: शीतल यादव
पिता: जेपी यादव
कार्यस्थल: बीएसएफ ११५ वीं बटालियन
नवीं कक्षा में पढऩे वाली शीतल का कहना है कि यह बिल्कुल नया अनुभव था। पापा के काम करने का तरीका बहुत ही अच्छा लगा। जिम्मेदारी के साथ देश की सीमाओं की सुरक्षा किस प्रकार की जाती है, इस बारे में समझा।
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बिटिया का नाम: खुशी कंवर
पिता: सवाई सिंह
कार्यस्थल: बीएसएफ ११५ वीं बटालियन
पापा बीएसएफ में है उनके काम से सीखा की देश की सेवा कैसे की जाती है। मैं घर में उनसे बॉर्डर के बारे में सवाल करती हूं। आज यहां पर पापा से मिल कर समझा की देश की सीमाओं की सुरक्षा कैसे की जाती है।
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बिटिया का नाम: ऐशनासिंह
पिता: राकेश कुमार
कार्यस्थल: बीएसएफ ११५ वीं बटालियन
पांचवी कक्षा की छात्रा ऐशना बताती है कि पापा के साथ दिनभर बॉर्डर पर किए जाने वाले कार्यों को समझा। पापा ने समझाया कि कैसे जवान बॉर्डर पर हमेशा सजग रहते हुए सीमाओं की रक्षा करते हैं।
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बिटिया का नाम: नेहा जांगिड़
पिता: मूलचन्द जांगिड़
कार्यस्थल: कलक्ट्रेट स्थित कार्यालय
पापा के ऑफिस आकर अच्छा लगा। मैने भी आज यहां आकर मेल खोलना, देखना और भेजना सीखा है। पापा के साथ कम्प्यूटर पर काम करना अच्छा लगा। मैं आगे भी ऑफिस आती रहूंगी।