बाड़मेर

बाड़मेर में अवैध खनन ने छीनीं 2 जिंदगियां: भाई को बचाने कूदा किरताराम आखिरी सांस तक हाथ थामे रहा, फिर भी दोनों न बच सके

बाड़मेर जिले में अवैध खनन से बने गहरे गड्ढे में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। पहले एक युवक पानी में डूबने लगा तो उसे बचाने के लिए दूसरा कूद गया, लेकिन दोनों गहराई में समा गए। ग्रामीणों और प्रशासन ने काफी प्रयास के बाद शव बाहर निकाले।
3 min read
Jul 17, 2026
Barmer Illegal Mining
मृतक युवक (पत्रिका फोटो)

बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले से एक दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। ग्रामीण थाना क्षेत्र के दरूड़ा गांव में शुक्रवार दोपहर अवैध खनन के कारण बने मौत के गहरे गड्ढे ने दो सगे चचेरे भाइयों की जिंदगी छीन ली। पैर फिसलने से गड्ढे के पानी में गिरे भाई को बचाने के लिए दूसरा भाई भी बिना सोचे-समझे कूद गया, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण दोनों ही काल के गाल में समा गए। इस हृदयविदारक हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया है।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दरूड़ा गांव के निवासी देवराम (18 वर्ष, पुत्र किशनाराम) और उनका चचेरा भाई किरताराम (20 वर्ष, पुत्र गणेशकुमार) अपने एक अन्य साथी प्रवीण के साथ घर से किसी काम के लिए निकले थे। घर से महज आधा किलोमीटर दूर, स्टोन क्रेशर के समीप अवैध खनन से बने पानी से लबालब गहरे गड्ढों के पास से गुजरते समय अचानक देवाराम का पैर फिसल गया। वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा।

अपने भाई को डूबता देख किरताराम ने अपनी जान की परवाह नहीं की और उसे बचाने के लिए तुरंत पानी में छलांग लगा दी। लेकिन गड्ढा इतना गहरा था कि दोनों ही खुद को संभाल नहीं पाए और पानी की गहराई में समा गए। किनारे पर खड़े तीसरे साथी प्रवीण ने जब यह मंजर देखा, तो उसने शोर मचाते हुए ग्रामीणों को इसके बारे में सूचित किया।

सेना और सिविल डिफेंस का रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचे। तत्काल जसाई स्थित सेना के कैंप को सूचना दी गई। मौके पर सेना के जवान, सिविल डिफेंस की टीम और स्थानीय पुलिस बल तैनात हुआ। करीब एक घंटे तक चले बेहद चुनौतीपूर्ण और कड़ी मशक्कत वाले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों युवकों को पानी से बाहर निकाला जा सका।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। ग्रामीण थाना के एएसआई ज्ञान सिंह ने बताया कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

अवैध खनन के 'डेथ ट्रैप' और प्रशासन की लापरवाही

इस हादसे ने एक बार फिर अवैध खनन और प्रशासन की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, दरूड़ा गांव के आसपास लगभग 20 से 30 स्टोन क्रेशर अवैध रूप से संचालित हैं। इन्होंने नियमों को ताक पर रखकर 50 से 100 फीट तक गहरे गड्ढे खोद दिए हैं। मानसून के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि ग्रामीणों के आने-जाने का मुख्य रास्ता भी इन्हीं मौत के कुओं के बिल्कुल किनारे से होकर गुजरता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से इन गड्ढों को बंद करवाने और सुरक्षा इंतजाम करने की गुहार लगाई, लेकिन खनन माफियाओं के रसूख के आगे अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं। दो होनहार किसान पिताओं के बेटों की इस तरह हुई असमय मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और अब पूरा गांव प्रशासन से इंसाफ और इन जानलेवा गड्ढों से मुक्ति की मांग कर रहा है।

Updated on:
17 Jul 2026 05:36 pm
Published on:
17 Jul 2026 05:36 pm