पहले फेज में कोरी-भीलड़ी का वर्कऑर्डर जारी किया गया, इस पर इन दिनों कार्य जारी है। ज्ञात रहे कि लूनी-भीलड़ी रेल मार्ग पर 24 घंटों में अनुमानित 50 से अधिक मालगाड़ियां संचालित होती हैं।
Indian Railway News: बालोतरा जिले के लूनी-समदड़ी-भीलड़ी रेल मार्ग पर आने वाले वर्ष में क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। वहीं इस मार्ग से गुजरने वाली मालगाड़ियों के लिए एक नया कोरिडोर स्थापित हो जाएगा। केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट लूनी-समदड़ी-भीलड़ी के 278 किलोमीटर में रेल लाइन दोहरीकरण होगा।
चार हिस्सों में होने वाले रेल दोहरीकरण के लिए रेलवे ने पहले चरण में मारवाड़ कोरी-भीलड़ी के बीच कार्य शुरू हो गया है। इसको तीन चार माह हो गए हैं। अब लूनी से बिशनगढ़ के बीच महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए वर्कऑर्डर जारी किया है। उक्त कार्य निर्माण को पूर्ण करने की प्रस्तावित अवधि 18 माह है। इस बड़े प्रोजेक्ट पर कुल 3530.92 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
पहले फेज में कोरी-भीलड़ी का वर्कऑर्डर जारी किया गया, इस पर इन दिनों कार्य जारी है। ज्ञात रहे कि लूनी-भीलड़ी रेल मार्ग पर 24 घंटों में अनुमानित 50 से अधिक मालगाड़ियां संचालित होती हैं। इस रेलमार्ग के दोहरीकरण पर कांडला बंदरगाह से सीधा जुड़ाव होने पर रेलवे के लिए यह मार्ग समृद्धि के द्वार खोलेगा।
रेलवे ने लूनी-बिशनगढ़ दूरी 97.5 किलोमीटर में निर्माण को लेकर कार्यदेश जारी किए हैं। इस पर 346 करोड़ रु़पए खर्च होंगे। इस मार्ग के लूनी, सतलाना, दूदिया, धुंधाड़ा, महेशनगर हॉल्ट, अजीत, समदड़ी, बामसीन, राखी, मोकलसर, बालवाड़ा, विशनगढ इन रेल स्टेशनों पर भवन निर्माण, प्लेटफार्म, मार्ग के छोटे पुलिया बनाने, अर्थवर्क करने का कार्य किया जाएगा। इन दिनों रेल पटरी के दूसरी लाइन बिछाने वाले भाग की सफाई की जा रही है। अन्य जरुरी कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही बड़े स्तर पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
लूनी- समदड़ी- भीलड़ी रेल मार्ग दोहरीकरण कार्य प्रारंभ होने से पूरे क्षेत्र में खुशी छाई हुई है। इससे जोधपुर-अहमदाबाद की यात्रा बहुत आसान होगी। सुदूरवर्ती प्रदेशों से संपर्क होने से बड़ा फायदा मिलेगा। क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।
लूनी-समदड़ी-भीलड़ी महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके दोहरीकरण से क्षेत्र में समृद्धि आएगी। विकास होने के साथ आवागमन में अच्छी सुविधा मिलेगी। आम आदमी का जीवन सरल होगा। लंबे समय से दोहरीकरण की मांग कर रहे थे।
जगमोहन सिंह गोगादेव