पचपदरा रिफाइनरी में प्रधानमंत्री के लोकार्पण से ठीक पहले लगी आग की जांच के लिए देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी NIA मैदान में उतर चुकी है। ये एजेंसी अब कई छोटे-बड़े पहलुओं पर तफ्तीश में जुट गई है।
राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में स्थित 'HRRL रिफाइनरी' में सोमवार को लगी आग ने पूरे देश को चौंका दिया है। कल (21 अप्रैल) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महा-परियोजना को राष्ट्र को समर्पित करने वाले थे, लेकिन अब पचपदरा की धरती पर उत्सव की शहनाई की जगह 'जांच की सायरन' गूँज रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम ने आज सुबह रिफाइनरी परिसर में दस्तक दी और कमान संभाल ली है।
साधारण आग की घटनाओं की जांच स्थानीय पुलिस या दमकल विभाग करता है, लेकिन पचपदरा में NIA का आना इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार इसे 'स्ट्रैटेजिक एसेट' (रणनीतिक संपत्ति) पर हमला या बड़ी साजिश मान रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश और गृह मंत्रालय की मुस्तैदी के बाद अब NIA उन सुरागों को तलाशेगी जो आम आंखों से ओझल हैं।
NIA की जांच का तरीका बेहद वैज्ञानिक और कड़ा होता है। ऐसे में माना जा रहा है कि एजेंसी इन 10 प्रमुख बिंदुओं पर फोकस कर सकती है:
NIA की टीम सबसे पहले 'ग्राउंड जीरो' यानी CDU-VDU यूनिट के हिस्से को सील करने, मौके के अवशेषों को लैब भिजवाने और ये पता लगाने की दिशा में कर कर सकती है, जिससे ये पता लगाया जा सके कि आग किसी केमिकल रिएक्शन से लगी है या किसी एक्सप्लोसिव (विस्फोटक) से।
रिफाइनरी के कंट्रोल रूम का सारा डेटा और सीसीटीवी फुटेज NIA अपने कब्जे में ले सकती है। हादसे से ठीक पहले सिस्टम में कोई बाहरी 'हैकिंग' या छेड़छाड़ तो नहीं हुई, इस एंगल से बारीकी से जांच हो सकती है।
रिफाइनरी परिसर और उसके आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में सक्रिय मोबाइल टावरों का 'डंप डेटा' निकाला जा सकता है। संदिग्ध कॉल और लोकेशन की ट्रेसिंग की जा सकती है।
रिफाइनरी में कार्यरत ठेका श्रमिकों और टेक्निकल स्टाफ की पृष्ठभूमि की जांच की जा सकती है। हाल ही में भर्ती हुए या संदिग्ध व्यवहार वाले लोगों से पूछताछ संभव है
वाल्व और फ्लैंज से हुए रिसाव की जांच होना तय है जिससे ये पता चल सकेगा कि क्या ये घिसावट की वजह से था या किसी ने जानबूझकर वाल्व के साथ छेड़छाड़ की थी।
आईबी (IB) और अन्य खुफिया एजेंसियों से मिले हालिया इनपुट का मिलान किया जा सकता है, कि क्या रिफाइनरी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर गड़बड़ी की कोई आशंका पहले से थी।
हीट एक्सचेंजर के डिजाइन और दबाव की जांच के लिए विदेशी विशेषज्ञों या राष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरों की सलाह ली जा सकती है।
प्रधानमंत्री के दौरे से 24 घंटे पहले इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या सुरक्षा घेरे में कोई सुराख था? NIA इसकी भी रिपोर्ट तैयार करेगी।
अगर आग लगी तो ऑटोमैटिक फायर सप्रेसर सिस्टम ने उसे तुरंत क्यों नहीं बुझाया? क्या सिस्टम को 'डिसेबल' किया गया था?
चूंकि रिफाइनरी देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय साजिश या 'इकोनॉमिक टेररिज्म' के एंगल को भी NIA खंगालेगी।