- अंधी मां गिरी तो पैर टूटे, रीढ की हड्डी में भी फे्रक्चर- ग्रामीणों के सहयोग से होती है दो समय खाने की व्यवस्था
- अंधी मां गिरी तो पैर टूटे, रीढ की हड्डी में भी फे्रक्चर
- ग्रामीणों के सहयोग से होती है दो समय खाने की व्यवस्था
परेऊ. गांव के पास ही रहने वाले 75 वर्षीय मालाराम की जिन्दगी में अंधकार सा छाया है। करीब 10 वर्ष पहले आंखों की रोशनी चली गई, पांच वर्ष बाद पत्नी को भी दिखना बंद हो गया। ऐसे में कुछ समय पहले नीचे गिरने से पैर टूट गए तथा रीढ की हड्डी फे्रक्चर हो गई।
एक बेटा है वह भी मानसिक कमजोर, उपर से किसी ने नशे की लत लगा दी। अब पुत्रवधू पर उन सास-ससुर व पति की सारसंभाल सहित बच्चों की जिम्मेदारी है। परिवार के सामने दो वक्त रोटी का इंतजाम नहीं हो रहा, साथ ही नशे की व्यवस्था चुनौती बन गया है। परिवार के सामने दो वक्त रोटी का इंतजाम नहीं हो रहा, साथ ही नशे की व्यवस्था चुनौती बन गया है।
अपना दु:खड़ा सुनाते हुए मालाराम ने बताया कि इलाज तो दूर दो वक्त रोटी के भी लाले पड़ रहे हैं। गांव के लोग सहायता दे जाते हैं, लेकिन कई बार आस-पड़ौस से मांग कर खाने की जुगत करनी पड़ती है।
पता नहीं पेंशन आती है या नहीं
मालाराम का कहना है कि उसके खाते में पेंशन भी आ रही है या नहीं उसे कोई जानकारी नहीं है। बीते कई माह से किसी का साथ नहीं होने से वह बैंक नहीं जा पाया। सरकारी सहायता भी नहीं मिल रही। गांव के लोगों ने शुक्रवार को उनके घर पहुंच आर्थिक मदद दी।
नहीं कर पाती मजदूरी
पुत्रवधू का कहना है कि उसके सास-ससुर व पति लाचार है। ऐसे में वह उन्हें छोड़कर कहीं मजदूरी पर भी नहीं जा सकती। पहले भी दिखाई नहीं देने से उसकी सास गिर कर घायल हो गई। गिड़ा तहसीलदार राकेश जैन ने बताया कि पता करवा कर बीपीएल परिवार को हर संभव मदद दिलाई जाएगी।