राजस्थान में 200 तहसीलदार पिछले 5 महीने से बिना किसी नियुक्ति और जिम्मेदारी के वेतन ले रहे हैं। सरकार इन पर अब तक करीब 1.75 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है, लेकिन इन्हें अब तक पोस्टिंग नहीं मिली।
बाड़मेर: राजस्थान में तहसीलदार और उप पंजीयक के पद खाली पड़े हैं। करीब पांच महीने पहले 200 कार्मिकों को पदोन्नति से तहसीलदार बना दिया, लेकिन इनको नियुक्तियां नहीं मिली हैं। तहसीलदार के खाली पड़े पदों पर कहीं नायब तहसीलदार काम संभाल रहे हैं तो कहीं पर अन्य तहसील के तहसीलदार को अतिरिक्त चार्ज मिला है।
राजस्व महकमे में तहसीलदार का पद अहम है। राजस्थान में करीब 425 तहसील है। इनमें तहसीलदार और उप पंजीयक के 300 के करीब पद रिक्त पड़े हैं। तहसील में प्रतिदिन राजस्व और अन्य कार्य से सैकड़ों लोगों का काम पड़ता है।
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कानून एवं न्याय व्यवस्था और राजस्व संबंधी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में भी तहसीलदार का पद महत्व रखता है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी तहसीलदार के रिक्त पदों को लेकर पूर्व में एक प्रश्न उठाते हुए राज्य में इससे व्यवस्था प्रभावित होने पर सवाल किया था।
राजस्थान सरकार की ओर से इसमें बिना वजह देरी की जा रही है। दिसंबर 2025 में 300 कार्मिकों को पदोन्नति से तहसीलदार बनाया गया, जिसमें 127 नायब तहसीलदार संवर्ग और 73 मंत्रालयिक कर्मचारी संवर्ग से पदोन्नति के बाद तहसीलदार बने हैं। इनको अन्य कार्य नहीं दिया गया है।
लिहाजा ये तहसीलदार के पद की तनख्वाह उठा रहे हैं, लेकिन इनके पास नया काम नहीं है। इससे राज्य सरकार 200 कार्मिकों की पदोन्नति का फायदा भी 5 महीने से नहीं ले पाई है। दो सौ कार्मिक करीब 175 लाख रुपए प्रति महीने तनख्वाह प्राप्त कर रहे हैं।
तहसीलदार पद पर नियुक्ति में देरी का कोई विशेष कारण सामने नहीं आया है। असल में राज्य सरकार के राजस्व महकमे की ओर से नियुक्ति की सूची को फाइनल नहीं किया जा रहा है। प्रतिपक्ष नेता के सवाल के जवाब में भी इसको लेकर विशेष कारण नहीं बताया गया था।
नियुक्ति को लेकर लंबा इंतजार चल रहा है। राज्य सरकार आदेश जारी करे तो ये तहसीलदारों के रिक्त पद तुरंत भर लिए जाएंगे। आम आदमी को सहूलियत मिल जाएगी।
-सुमित भारद्वाज, अध्यक्ष नवपदोन्नत तहसीलदार संघ