Crude Oil Production: राजस्थान के बाड़मेर स्थित मंगला ऑयल फील्ड में रोजाना 2,000 बैरल तेल उत्पादन बढ़ गया है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। उन्नत तकनीकों और साइडट्रैकिंग के जरिए तेल उत्पादन में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहराया हुआ है।
बाड़मेर। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पूरे विश्व में चल रहे तेल संकट के बीच राजस्थान से एक पखवाड़े में दूसरी बार खुशखबरी आई है। अप्रैल के पहले सप्ताह में, जहां सीमावर्ती जैसलमेर में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने बाघेवाला तेल क्षेत्र में उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, वहीं अब बाड़मेर के मंगला ऑयल फील्ड से प्रतिदिन 2 हजार बैरल उत्पादन बढ़ गया है।
कच्चे तेल उत्पादन में यह उपलब्धि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है। परिपक्व ऑनशोर तेल क्षेत्रों से मिलने वाली यह बढ़त निकट भविष्य में देश के तेल उत्पादन को संभालने में मदद कर सकती है, खासकर तब, जब भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतें आयात से पूरी करता है।
मंगला फील्ड की खोज वर्ष 2004 में हुई थी और 2009 में यहां से उत्पादन शुरू हुआ। देश की सबसे बड़ी ऑनशोर तेल खोजों में शामिल इस फील्ड ने राजस्थान को कच्चे तेल उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। कोरोना से पहले उत्पादन करीब दो लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, लेकिन इतने वर्षों तक कुओं से तेल निकालने के कारण कुओं में तेल कम हो गया। कोरोना के बाद इसमें गिरावट आई और उत्पादन करीब 70 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया।
कुओं में तेल की कमी की चुनौती से निपटने के लिए केयर्न ऑयल एंड गैस की सबसर्फेस और जियोसाइंस टीमों ने सटीक इंजीनियरिंग और उन्नत तकनीकी रणनीति अपनाई। केयर्न (वेदांता) कंपनी सूत्रों के अनुसार, पुनर्विकास के तहत किए गए कार्यों, खासकर साइडट्रैकिंग तकनीक, ने उत्पादन बढ़ाने में मदद की।
इस तकनीक में नए कुएं खोदने के बजाय मौजूदा कुओं को पुनः दिशा देकर उन हिस्सों तक पहुंच बनाई जाती है, जहां पहले तेल नहीं निकाला जा सका था, जिससे लागत और सतही प्रभाव दोनों कम रहते हैं। इसके साथ ही फील्ड में गिरावट को नियंत्रित करने और रिकवरी बढ़ाने के लिए कंपनी ने उन्नत तेल रिकवरी तकनीकों, जैसे पॉलिमर इंजेक्शन और एल्केलाइन सरफेक्टेंट पॉलिमर का भी उपयोग किया है।