बाड़मेर

Rajasthan Border Security: भारत-PAK सरहद का नया ‘सुरक्षा ब्लूप्रिंट’, बाड़मेर-जैसलमेर सहित 4 जिले ‘स्पेशल वॉच जोन’ घोषित

राजस्थान से सटी भारत-पाक सीमा पर गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर बनेंगे स्पेशल वॉच जोन। जानिए क्या है सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंट।
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Updated: 19 Jun 2026, 9:27 AM IST
Rajasthan Pakistan Border Security Blueprint 50 KM Watch Zone BSF MHA Action
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राजस्थान से सटी भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा को अभेद्य किला बनाने के लिए एक बहुत बड़ा रक्षात्मक और प्रशासनिक कदम उठाया गया है। सीमा पार से होने वाली नापाक हरकतों, नशीले पदार्थों की तस्करी और आधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए होने वाली घुसपैठ को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए गृह मंत्रालय के आदेश पर सुरक्षा का एक नया ब्लूप्रिंट तैयार कर धरातल पर लागू कर दिया गया है। इस नए मास्टर प्लान के तहत राजस्थान के 4 सीमावर्ती जिलों बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर को पूरी तरह से 'स्पेशल वॉच जोन' के रूप में चिन्हित किया गया है। अब सीमा सुरक्षा बल (BSF), जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय व राज्य की खुफिया सुरक्षा एजेंसियां एक संयुक्त कमांड के रूप में काम करेंगी। इस साझा प्रयास का मुख्य उद्देश्य बॉर्डर से सटे 50 किलोमीटर के पूरे दायरे में होने वाली हर गतिविधि को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।

India-PAK border in Rajasthan - File PIC

रेडक्लिफ लाइन पर खींची गई सुरक्षा की नई रेखा

राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर स्थित पाकिस्तान की सीमा हमेशा से सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील रही है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए अब गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा को लेकर विशेष एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए हैं। नए ब्लूप्रिंट के अनुसार, अब सीमा सुरक्षा केवल बॉर्डर की चौकियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बॉर्डर के अंदरूनी 50 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है।

इस संयुक्त अभियान के तहत सभी संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, खुफिया विभाग के अधिकारी और BSF के आला अधिकारी नियमित रूप से बैठकें करेंगे और रणनीतिक इनपुट साझा करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक और सैन्य तालमेल पहले से कहीं अधिक मजबूत और त्वरित होने वाला है।

'स्पेशल वॉच जोन'- 15 KM के भीतर तुरंत एक्शन

इस नए सुरक्षा ब्लूप्रिंट का सबसे पहला और सीधा असर बॉर्डर के बिल्कुल नजदीक रहने वाले गांवों और ढाणियों पर दिखने लगा है। राजस्थान के 4 सीमावर्ती जिलों को 'स्पेशल वॉच जोन' में शामिल कर 15 किलोमीटर की सीमा के भीतर मौजूद सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को तुरंत प्रभाव से हटाने की सख्त हिदायत दी गई है।

बाड़मेर जिले की ही बात करें तो यहाँ सीमा के सबसे नजदीक करीब 100 गांव स्थित हैं। इन गांवों में गुरुवार को प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाकर भौतिक सर्वे किया गया और संदिग्ध व बिना अनुमति के बने ढांचों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन का साफ कहना है कि देश की सुरक्षा से जुड़े इस दायरे में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ISI के पुराने तस्करी नेटवर्क पर वार

सुरक्षा एजेंसियों के पास लंबे समय से यह इनपुट रहे हैं कि भारत-पाक बॉर्डर से महज 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भारतीय गांवों के समानांतर ही पाकिस्तान की सीमा के भीतर भी 5 और 10 किलोमीटर के दायरे में कई छोटे-छोटे गांव और ढाणियां मौजूद हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) लंबे समय से इन सीमांत गांव-ढाणियों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों और नापाक हरकतों को अंजाम देने के लिए करती रही है।

इस नए वॉच जोन की स्थापना के बाद, सुरक्षा एजेंसियों ने आईएसआई के पुराने एक्टिव और स्लीपर तस्करी नेटवर्क पर अपनी निगाहें पूरी तरह से टेढ़ी कर ली हैं। अतीत में सीमा पार से हेरोइन, जाली नोट और हथियारों की तस्करी में शामिल रहे स्थानीय संपर्कों और संदिग्धों की सूचियां दोबारा खंगाली जा रही हैं, ताकि उनके वर्तमान नेटवर्क को जड़ से काटा जा सके।

एंटी-ड्रोन सिस्टम और लेजर फेंसिंग से लैस होगी सरहद

पिछले कुछ समय में देश की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों को गिराए जाने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इस तकनीकी चुनौती से निपटने के लिए नए ब्लूप्रिंट में सीमा सुरक्षा बल (BSF) को अत्यधिक आधुनिक संसाधनों से लैस करने का प्रावधान किया गया है।

अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम: बॉर्डर पार से आने वाले किसी भी संदिग्ध रिमोट-कंट्रोल्ड ड्रोन या उड़ने वाली वस्तु को हवा में ही डिटेक्ट कर उसे न्यूट्रलाइज या क्रैश करने के लिए बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती की जा रही है।

स्मार्ट लेजर फेंसिंग: जिन नदी-नालों, खादर या भौगोलिक रूप से कठिन रास्तों पर पारंपरिक कंटीली तारों की बाड़ लगाना संभव नहीं है या जहाँ फेंसिंग क्षतिग्रस्त हो जाती है, वहाँ 'लेजर फेंसिंग' का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे अदृश्य लेजर किरणों के कटते ही सुरक्षा कंट्रोल रूम में तुरंत अलार्म बज जाएगा।

Rajasthan India Pak Border- AI Image

    इन 6 प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान

    सीमा सुरक्षा को केवल हथियारों के दम पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक नियंत्रण और खुफिया सूचनाओं के जरिए भी मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए नए ब्लूप्रिंट में 6 बहुत ही महत्वपूर्ण और कड़े नियम तय किए गए हैं:

    • वैध-अवैध निर्माणों का डेटाबेस: बॉर्डर क्षेत्र में बने सभी धर्म-मजहब से जुड़े वैध और अवैध निर्माणों की एक विस्तृत और प्रमाणित सूची तैयार की जाएगी, ताकि कोई भी नया ढांचा बिना अनुमति के न बन सके।
    • जमीन आवंटन का चिन्हीकरण: सीमावर्ती क्षेत्रों में काम करने वाली बाहरी कंपनियों, निजी कॉर्पोरेट्स और बड़ी संस्थाओं को पिछले वर्षों में आवंटित की गई जमीनों का पुनर्मूल्यांकन और चिन्हीकरण किया जाएगा।
    • गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) पर नजर: बॉर्डर के बेहद संवेदनशील इलाकों में सामाजिक कार्यों या अन्य गतिविधियों के नाम पर सक्रिय गैर-सरकारी संस्थाओं के फंड्स, पदाधिकारियों और उनके वास्तविक उद्देश्यों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
    • डिजिटल और इंटरनेट इंटेलिजेंस: इंटरनेट के माध्यम से सोशल मीडिया, सैटेलाइट कम्यूनिकेशन या एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए सीमा पार पाकिस्तान में होने वाले सभी प्रकार के डिजिटल संपर्कों की गहन सायबर इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग होगी।
    • कार्मिकों और स्थानीय संपर्कों की निगरानी: बॉर्डर के गांवों में तैनात सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्मिकों, संविदाकर्मियों और उनके स्थानीय व बाहरी संपर्कों की गतिविधियों का नियमित रिकॉर्ड रखा जाएगा।
    • जमीन आवंटन पर सख्त नियम: अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के भीतर आने वाली किसी भी सरकारी या निजी भूमि के नए आवंटन, लीज या खरीद-फरोख्त को लेकर बेहद कड़े सुरक्षा नियम लागू किए जाएंगे।
    Updated on:
    19 Jun 2026, 9:27 AM IST
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