( fraud by rajasthan police constable ) आरोपी ने यह मामला बाड़मेर तक ही सीमित नहीं रखा। सीआईडी आईबी में कार्यरत कांस्टेबल मोतीराम व्यास जोधपुर, पाली और जैसलमेर सहित प्रदेश की राजधानी जयपुर में भी पैसे हड़पने की नियत से आम लोगों को ठगने में नहीं चूका। ( fraud by rajasthan police constable ) बाड़मेर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंदन दान बारठ ने संज्ञान लेते हुए कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त ( Terminate police constable ) कर दिया।
बाड़मेर
जब किसी के साथ धोखाधड़ी या अन्य किसी प्रकार का अत्याचार होता है तो सबसे पहले उसे पुलिस की याद आती है और पुलिस से फरियाद लगाकर लोग अपनी समस्याओं को सुलझाते हैं। लेकिन राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें पुलिस की विशेष शाखा सीआईडी बीआई के एक कांस्टेबल ने आम लोगों से करीब 1 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हड़प ली वह भी इस झूठे झांसे में कि वह बेरोजगार लोगों को हाईकोर्ट में चपरासी की नौकरी दिलाएगा।
कांस्टेबल के खिलाफ धोखाधड़ी एवं अन्य धाराओं में 11 मामले दर्ज ( fraud by rajasthan police constable )
आरोपी ने यह मामला बाड़मेर तक ही सीमित नहीं रखा। सीआईडी आईबी में कार्यरत कांस्टेबल मोतीराम व्यास जोधपुर, पाली और जैसलमेर सहित प्रदेश की राजधानी जयपुर में भी पैसे हड़पने की नियत से आम लोगों को ठगने में नहीं चूका। इस पूरे घटनाक्रम की लोगों को भनक लगी तो एक के बाद एक विभिन्न जिलों में मुकदमे होने शुरू हो गए। प्रदेश भर में अब तक इस कांस्टेबल के खिलाफ धोखाधड़ी एवं अन्य धाराओं में 11 मामले दर्ज हो गए।
कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त किया ( Terminate police constable )
इस पूरे मामले पर राजस्थान पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार सीआईडी बीआई के बाड़मेर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंदन दान बारठ ने संज्ञान लेते हुए कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त कर दिया। साथ ही आम लोगों से अपील की ऐसे लोगों से बचकर रहें कोई भी व्यक्ति सेटिंग करके सरकारी नौकरी ( govt job ) नहीं दिला सकता उसके लिए योग्यता होना आवश्यक है। ऐसे लोग अगर झांसे में डालने की कोशिश करें तो उसकी सूचना पुलिस को अवश्य दें।
पिछले 8 वर्षों से लोगों से रूपए हड़पने का काम कर रहा था ( barmer crime news )
गौरतलब है कि मोतीलाल पिछले 9 वर्षों से बाड़मेर में सीआईडी शाखा में कार्यरत था और पिछले 8 वर्षों से लोगों से रूपए हड़पने का काम कर रहा था। कई बार इसको लेकर शिकायतें भी हुई जिस पर अधिकारियों ने विभागीय कार्यवाही भी की लेकिन, आखिरकार बर्खास्त होना पड़ा।
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