बाड़मेर

Rajasthan Viral News: खेत में 5 लाख रुपए दबाकर भूल गया किसान, जुताई के दौरान मिली रकम; नोटों को चट कर गई दीमक

Balotra Viral News: चोरों से बचाने के लिए खेत की मिट्टी में दबाकर रखी रकम किसान को वापस तो मिल गई, लेकिन तब तक उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।
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Aug 09, 2026
Balotra Viral News
खेत में मिले नोटों को चट कर गई दीमक। फोटो: पत्रिका

बालोतरा। चोरों से बचाने के लिए खेत की मिट्टी में दबाकर रखी रकम किसान को वापस तो मिल गई, लेकिन तब तक उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र में प्लॉट बेचकर मिली लाखों रुपए की रकम को किसान मांगीलाल मेघवाल ने पॉलिथीन की थैली में भरकर खेत में दबा दिया था। कुछ समय बाद वह उस जगह को भूल गया और काफी तलाश के बावजूद पांच लाख रुपए से भरी थैली नहीं मिली।

बारिश के मौसम में खेत की जुताई के दौरान अचानक वही थैली मिट्टी में नजर आई। किसान ने उसे बाहर निकाला तो रकम की हालत देखकर उसके होश उड़ गए। थैली में रखी करीब 75 प्रतिशत रकम दीमक चट कर चुकी थी। बड़ी मात्रा में नोट गलकर मिट्टी में तब्दील हो चुके थे। कई नोटों के केवल छोटे-छोटे टुकड़े ही बचे थे। जिस रकम को किसान ने चोरों से बचाने के लिए सुरक्षित समझकर खेत में छिपाया था, वही रकम मिट्टी के नीचे पड़े-पड़े खराब हो गई। राजस्थान में सभवत: ऐसा पहला मामला माना जा रहा है।

खेत में मिले नोटों को देखता किसान। फोटो: पत्रिका

याद नहीं रही जगह, तलाशता रहा रकम

किसान के मुताबिक उसने प्लॉट बेचने से मिली रकम को चोरों से सुरक्षित रखने के लिए बैंक के बजाय खेत में छिपाकर रखा था। रकम को पॉलिथीन की थैली में भरकर मिट्टी में दबा दिया गया। बाद में वह उस जगह को भूल गया। इसके बाद किसान ने काफी तलाश की, लेकिन उसे पैसों की थैली नहीं मिल सकी। बारिश के बाद खेत की जुताई शुरू हुई तो मिट्टी के भीतर दबाई गई थैली अचानक सामने आ गई। थैली मिलने पर किसान को उम्मीद थी कि उसकी रकम सुरक्षित मिल जाएगी, लेकिन उसे खोलने के बाद सामने आया दृश्य उसकी उम्मीदों के बिल्कुल उलट था। मेहनत और जमीन के सौदे से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा दीमक के कारण नष्ट हो चुका था।

रकम मिली, लेकिन बचा बहुत कम

घटना के बाद खेत में मिले नोटों के टुकड़ों और खराब हो चुकी करेंसी की तस्वीरें सामने आई हैं। तस्वीरों में नोटों की खराब हालत पूरे मामले की कहानी बयां कर रही है। किसान के लिए यह रकम मिलना राहत के बजाय बड़ी पीड़ा लेकर आया, क्योंकि चोरों से बचाने के लिए छिपाई गई रकम का करीब तीन-चौथाई हिस्सा उसके हाथ में आने से पहले ही नष्ट हो चुका था। यह घटना किसान की उस पीड़ा को सामने लाती है, जिसमें रकम को सुरक्षित रखने की कोशिश आखिरकार उसके बड़े नुकसान का कारण बन गई।

Updated on:
09 Aug 2026 01:33 pm
Published on:
09 Aug 2026 01:27 pm