
बालोतरा.
दो दशक से सरकारी नौकरी की आशा में नाममात्र दिहाड़ी पर जनता जल योजना में कई श्रमिक कार्य रहे हंै। उनको उम्मीद है तो बस यह की, देर सवेर सरकार उनको जलदाय विभाग में स्थायी नियुक्ति देगी, लेकिन यह इंतजार लम्बा होता जा रहा है। उनकी पीड़ा इस बात को लेकर है कि जलदाय विभाग में सैकड़ों पद रिक्त है और सरकार को जरूरत भी है, लेकिन फायदा नहीं मिल रहा और वे दिहाडी मजदूरी पर भी कार्य कर रहे हैं।
पेयजल योजनाओं के संचालन व रखरखाव को लेकर 1997 में जनता जल योजना में लाइनमैन के रूप में श्रमिक नियुक्त किए थे। काम के बदले में इन्हें नाममात्र मानदेय दिया जाता था। सरकार के दिहाड़ी से कम मानदेय देने के बावजूद प्रदेश भर में नियुक्त हजारों जल श्रमिक सरकारी नौकरी की आस में वर्षों तक सेवा देते रहे। सरकार के समय-समय पर मानदेय में नाममात्र बढ़ोतरी करने पर भी ये स्थायी सरकारी नौकरी की आस में कार्य करते रहे। सरकार ने वर्ष 2011 में उन्हें जलदाय विभाग से हटाते हुए ग्राम पंचायतों के माध्यम से नियुक्त किया। जलदाय विभाग की बजाय पंचायतीराज विभाग से मानदेय का भुगतान करने का निर्णय लिया।
स्थार्यी नौकरी तो दूर, भर्ती निकाल किया मजाक - 2013 में सरकार ने लाइनमैन के 13 पदों पर भर्ती निकाली। इस पर भर्ती में पहले वरीयता देने की मांग को लेकर जल मित्र न्यायालय की शरण में गए। न्यायालय ने कार्य अनुभव पर भर्ती में वीरायता देने के निर्देश दिए। इस पर सरकार ने इन पदों के लिए जल मित्रों से आवेदन मांगे। प्रदेश में करीब 13 हजार व अकेले बाड़मेर में 339 जल मित्र हैं। इस पर नाममात्र 13 पदों पर भर्ती करने से इनको फायदा नहीं मिल पाया और स्थायी नौकरी की आस अधूरी ही रह गई।
क्या है जनता जल योजना- जनता जल योजना गांवों में संचालित विभिन्न जलस्रोतों पर ग्राम पंचायत को रख-रखाव का जिम्मा देते हुए इनसे जलापूर्ति का अधिकार दिया हुआ है। ग्राम पंचायत ने मशीनरी संचालित करने के लिए मानदेय पर श्रमिकों को लगा रखा है, जिन्हें जल मित्र कहा जाता है।