
Barwani news: प्रशासन की बेरुखी और जनप्रतिनिधियों के टूटे वादों से तंग आकर आखिर उबादगढ़ के खोड़ी पलास फलिया के ग्रामीणों ने अपने हाथों में फावड़ा और कुदाल थाम ली। वर्षों से सड़क की मांग कर रहे 35 घरों के 250 से ज्यादा लोगों ने चंदा जुटाकर जेसीबी बुलाई और श्रमदान से पहाड़ काटकर 2 किमी लंबी कच्ची सडक़ बनानी शुरू कर दी। एक तरफ ये एकता और जुझारूपन की मिसाल है, तो दूसरी तरफ सरकारी तंत्र की नाकामी पर बड़ा सवाल।
विकासखण्ड (Barwani) से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था पर कई सवाल भी खड़े करती है। वर्षों तक सडक़ निर्माण की मांग पूरी नहीं हुई तो ग्राम पंचायत उबादगढ़ के खोड़ी पलास फलिया के लोगों ने खुद चंदा जुटाया, जेसीबी मशीन लगाई और अब श्रमदान कर पहाड़ काटकर दो किलोमीटर लंबी कच्ची सडक़ बना रहे हैं।
गांव के लोग कहते हैं कि जब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने उनकी नहीं सुनी तो उन्होंने अपने विकास का रास्ता खुद बनाने का फैसला कर लिया। गांव (Barwani Khodi palas phaliya village) को मुख्य सडक़ से जोडऩे वाला मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाता था, जिससे गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से करीब टूट जाता था। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती थी, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं था।
उबादगढ़ के खोड़ी पलास फलिया में वर्षों से सडक़ नहीं बनी। ग्रामीणों ने पंचायत से जिला प्रशासन तक कई बार आवेदन दिए, जनसुनवाई में गुहार लगाई। चुनाव में सडक़ के वादे हुए, मगर नतीजे बाद सब भूल गए। थक-हारकर ग्रामीणों ने खुद सडक़ बनाने का फैसला किया। गांव में बैठक कर युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने घर-घर जाकर चंदा जुटाया। सक्षम लोगों ने दस-दस हजार दिए, बाकी ने क्षमता अनुसार मदद की। किसी ने नकद दिया तो किसी ने डीजल और मशीन की व्यवस्था की। अब ग्रामीण श्रमदान से सडक़ निर्माण में जुटे हैं।
ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए चंदे से जेसीबी मशीन बुलाई गई और पहाड़ी क्षेत्र (Barwani) में सडक़ निर्माण का काम शुरू कर दिया गया। जेसीबी की मदद से रास्ते की सफाई, समतलीकरण और बड़े पत्थरों को हटाने का कार्य किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण स्वयं फावड़े, कुदाल और तसलों के साथ श्रमदान में जुटे हुए हैं। गांव के युवाओं ने दो टीमें बनाई हैं, जिनमें प्रतिदिन 35 से 40 ग्रामीण सडक़ निर्माण कार्य में हिस्सा ले रहे हैं।
पिछले एक सप्ताह से लगातार काम जारी है और अब तक करीब आधा किलोमीटर सडक़ तैयार हो चुकी है। ग्रामीणों का दावा है कि शेष डेढ़ किलोमीटर सडक़ भी जल्द तैयार कर ली जाएगी। सडक़ निर्माण में महिलाओं की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। कई महिलाएं श्रमदान के साथ काम करने वाले लोगों के लिए पानी और भोजन की व्यवस्था भी संभाल रही हैं।
ग्रामीण सबा ने बताया कि हमने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क बनाने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर गांव वालों ने चंदा किया, जेसीबी लगाई और अब हम सभी मिलकर सडक़ बना रहे हैं। ग्रामीण महिला रमा का कहना है कि सडक़ बनने से सबसे ज्यादा राहत महिलाओं और बच्चों को मिलेगी, क्योंकि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। बारिश में रास्ता बंद हो जाता था। बच्चों की पढ़ाई और मरीजों को अस्पताल ले जाने में बहुत परेशानी होती थी। इसलिए हमने गांव वालों के साथ मिलकर सडक़ बनाने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ बनने से बच्चों को स्कूल पहुंचने, किसानों को फसल बाजार ले जाने और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में सुविधा होगी। युवाओं ने इसे जनआंदोलन बना दिया है। गांव से बाहर रहने वालों ने भी आर्थिक मदद भेजी है। ग्रामीणों ने कहा कि ये मजबूरी का परिणाम है। समय पर प्रशासन (Barwani) ध्यान देता तो चंदा-श्रमदान की जरूरत न पड़ती। ग्रामीणों ने मार्ग का सर्वे कर सरकारी योजना में शामिल कर पक्की सडक़ बनाने की मांग की है।