डिजिटल लैंड रिकॉर्ड कार्य अधूरा होने से किसानों को लोन व नामांतरण में परेशानी हो रही है।
गजानंद यादव (गोविन्दगढ़ चौमूं)
सरकार ने आदर्श तहसील निर्माण, रेवेन्यू से जुड़े कार्यों की कार्यप्रणाली, सेवाओं को बेहतर करने के उद्देश्य, किसानों के आपसी विवाद रोकने व रिकॉर्ड की पारदर्शिता के लिए मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के तहत चौमूं तहसील को चुना है, लेकिन चौमूं उपखंड में ग्राम पंचायतों के राजस्व रिकाॅर्ड डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड समय पर पूरे नहीं होने के कारण तहसील के 67 से अधिक गांवों का लैंड रिकॉर्ड लॉक हो गया है। नतीजतन, रहन नामांतरण नहीं हो रहा है, जिससे कृषि कार्य के लिए बैंकों से किसान ऋण नहीं ले पा रहे हैं। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड व सिक्स वन, खातों की ऑडी लिमिट नहीं बन रही है। किसानों के बेचान सहित अन्य नामांतरण भी नहीं खोले जा रहे हैं। इस प्रोग्राम के अंतर्गत सेग्रीगेशन एवं वन टू वन मैचिंग करते हुए शत प्रतिशत तरमीम की जा रही है, लेकिन यह काम धीमा चल रहा है। चौमूं तहसील में इस प्रोग्राम का काम एक कंपनी को सौंपा हुआ है।
सेटेलाइट से नाप रहे खेत-खलिहान
कार्यक्रम में चौमूं तहसील में सर्वे और री-सर्वे से सेटेलाइट से राजस्व ग्राम व खेत का नक्शा बनाया है। साथ ही भू अभिलेख मानचित्र, सूचनाओं का संधारण, भूमि खसरा, नक्शा, नामांतरण, राजस्व अभिलेख तैयार किया गया है। इसमें मौका, जमाबंदी व नक्शा में खेत की नाप हुई है, जिन किसानों के मौके पर ज्यादा जमीन है। वह सरकारी दर्ज होने के साथ ही सरकारी लैंड बैंक भी बनाया गया है।
55 गांवों का लॉक हटा
चौमूं तहसील में 122 गांव हैं, जिनमें अक्टूबर, 2024 में डीआईएलआरएमपी के तहत लैंड रिकॉर्ड को लॉक किया था, लेकिन दो माह पूर्व 55 गांवों के लैंड रिकॉर्ड का लॉक हट गया, जबकि 67 गांवों को लैंड रिकॉर्ड अभी भी लोक है। ऐसे में किसानों को रहन नामांतरण, कृषि कार्य के लिए बैंक से लोन, किसान क्रेडिट कार्ड व सिक्स वन, खातों की ऑडी लिमिट, बेचान सहित अन्य नामांतरण के लिए परेशानी हो रही है। किसान बैंकों व राजस्व विभाग के कार्यालयों के चक्कर काट को मजबूर हैं।
12 जिलों की 134 तहसीलों में सर्वे
डीआइएलआरएमपी के तहत प्रदेश के 12 जिले जयपुर, टोंक, जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, भरतपुर, नागौर, धोलपुर, बारां, दौसा, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा के 134 तहसीलों में सर्वे और री-सर्वे कर राजस्व गांव व खेतों के नक्शे बनाए जा रहे हैं। इधर, प्रोग्राम में जयपुर जिले की 21 तहसील शामिल हैं। इसमें से प्रथम फेज में सिर्फ चौमूं तहसील का रेवेन्यू रिकॉर्ड का मॉडर्नाइजेशन किया जा रहा है, लेकिन इस तहसील के 67 गांवों का रिकॉर्ड लॉक है।
रहन नहीं हट रहा
ग्राम नाड़िया निवासी परसाराम ने बताया कि एक महीने पहले सेन्ट्रल बैंक में केसीसी जमा करवाकर दूसरे बैंक से ऑडी लिमिट बनाई थी, लेकिन जमाबंदी में रहन नहीं हटने व रहन नहीं चढ़ने के कारण बैंक व राजस्व विभाग के कार्यालयों के चक्कर काट रहा हूं।
केसीसी नहीं बन पाई
नांगल भरड़ा निवासी सुगन दुषाद ने बताया कि नवंबर, 2024 में केसीसी ऋण के लिए आवेदन किया था, कार्रवाई पूर्ण होने के बाद जमाबंदी पर रहन नहीं चढ़ने के कारण केसीसी नहीं बन पाई है। तब से लगातार राजस्व विभाग व बैंक के चक्कर काट कर थक गया हूं।
छह माह से परेशान
मलिकपुर निवासी अजय कुमावत ने बताया कि केसीसी की ऑड़ी लिमिट के लिए आईसीआईसीआई बैंक चौमूं में आवेदन किया था, लेकिन जमाबंदी में रहन नहीं चढ़ने के कारण 6 माह से पटवारी, उपतहसील व तहसील में चक्कर काट रहा हूं।
इनका कहना है...
ढाई माह पूर्व सर्वे और री-सर्वे सहित संपूर्ण रिकॉर्ड व कार्रवाई कर उपखंड अधिकारी द्वारा प्रमाणित कर भू - प्रबंधन विभाग को सौंप दिया है। दो माह पूर्व 55 गांवों के लैंड रिकॉर्ड खुल गया है। शेष गांवों का लैंड रिकॉर्ड भू प्रबंधन विभाग एवं एनआईसी के स्तर पर लॉक है। मामले को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है।
-डाॅ.विजयपाल विश्नोई, तहसीलदार चौमूं