बस्सी

Rajasthan : LPG गैस संकट का असर: लकड़ी बाजार में उछाल, एक हफ्ते में दाम लगभग दोगुने, जानें भाव

LPG Gas Shortage : जयपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू और जमवारामगढ़ उपखंड सहित पूरे जयपुर जिले में एलपीजी गैस की किल्लत अब केवल घरेलू परेशानी तक सीमित नहीं रही है। इसका असर पर्यावरण पर भी पड़ने लगा है।

2 min read
Mar 21, 2026
बस्सी में हलवाई की दुकान पर पड़ा लकड़ियों का ढेर व लकड़ी भट्टी पर बनती मिठाई। फोटो पत्रिका

बस्सी। जयपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू और जमवारामगढ़ उपखंड सहित पूरे जयपुर जिले में एलपीजी गैस की किल्लत अब केवल घरेलू परेशानी तक सीमित नहीं रही है। इसका असर पर्यावरण पर भी पड़ने लगा है। गैस सिलेंडरों की कमी के चलते लोग फिर से पारम्परिक ईंधन लकड़ी की ओर लौटने लगे हैं। इससे लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है और हरे पेड़ों की कटाई का खतरा भी गहराने लगा है। स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले दिनों में पर्यावरण संतुलन प्रभावित हो सकता है।

ग्रामीण इलाकों में पहले से ईंधन के लिए लकड़ी का उपयोग होता रहा है, लेकिन अब शहरों में भी इसकी मांग बढ़ना चिंता का विषय बन गया है। आरा मशीन संचालकों के अनुसार गैस की कमी का सीधा असर लकड़ी बाजार पर दिखाई देने लगा है। पिछले एक सप्ताह में लकड़ी की उपलब्धता कम हुई है।

ये भी पढ़ें

राजस्थान में LPG Cylinder को लेकर बड़ा फैसला, इसके बिना नहीं मिलेगा सिलेंडर, गैस एजेंसियों को आदेश जारी

गत सप्ताह तक लकड़ी के भाव करीब 450 रुपए प्रति क्विंटल थे, जो अब बढ़कर 800 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि लकड़ी के अत्यधिक उपयोग से जंगलों पर दबाव बढ़ेगा। समय रहते नियंत्रण नहीं किया तो इसका दीर्घकालीन असर सामने आ सकता है। उन्होंने सरकार से गैस आपूर्ति सुचारू करने और वैकल्पिक ईंधन के साधनों को बढ़ावा देने की मांग की है।

लकड़ी की भट्टियों का सहारा

गैस की किल्लत का असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी साफ नजर आ रहा है। मिठाई व्यवसाय से जुड़े हलवाई अब गैस की जगह लकड़ी की भट्टियों का सहारा लेने लगे हैं। बस्सी के हलवाई श्रवण कुमार ने बताया कि पहले उनकी दुकान पर पूरा काम एलपीजी गैस भट्टियों पर होता था, लेकिन अब गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने से उन्हें लकड़ी की भट्टी पर काम करना पड़ रहा है। इससे काम करने में समय और मेहनत दोनों अधिक लग रहे है।

शहरों में भी बढ़ी मांग

पहले शहरों में लगभग हर घर में एलपीजी सिलेंडर से ही खाना पकता था, लेकिन अब वहां भी लकड़ी की मांग बढ़ने लगी है। गैस की अनियमित आपूर्ति के चलते लोग वैकल्पिक ईंधन की तलाश कर रहे हैं और लकड़ी सबसे आसान विकल्प बन रही है।

यदि लकड़ी की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो हरे पेड़ों की कटाई तेज हो सकती है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का खतरा है। पेड़ों की संख्या घटने से हरियाली कम होगी और तापमान वृद्धि व प्रदूषण जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

ये भी पढ़ें

अजमेर में रसद विभाग की बड़ी कार्रवाई, खेत में बने गोदाम व घर से 512 गैस सिलेंडर जब्त, मचा हड़कंप

Updated on:
21 Mar 2026 03:42 pm
Published on:
21 Mar 2026 03:41 pm
Also Read
View All

अगली खबर