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Chhattisgarh Naxal News: बस्तर में कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर मिला सबसे अधिक आईईडी, 23 दिनों तक चले ऑपरेशन के बाद मिली सफलता

Baster News: 23 दिनों तक चले विशेष अभियान के दौरान सबसे अधिक आईईडी बरामद किए गए। लगातार सर्च और डी-माइनिंग ऑपरेशन से बस्तर का 99 फीसदी इलाका आईईडी मुक्त हो चुका है।

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Jun 19, 2026
Chhattisgarh Naxal News
कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर मिला सबसे अधिक आईईडी (Photo Patrika)

Bastar IED Free: बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में बड़ी सफलता मिली है। यहां 23 दिनों तक चले लंबे ऑपरेशन के दौरान सबसे अधिक संख्या में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बरामद किए गए, जिससे नक्सलियों की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ। लगातार सर्च और डी-माइनिंग अभियान के चलते क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है और नक्सली नेटवर्क पर गहरी चोट पहुंची है।

Naxal Bombs Seized: आईईडी के खतरे को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास

बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के बाद अब सुरक्षाबलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नक्सलियों द्वारा पहले से प्लांट किए गए प्रेशर और कमांड आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) को निष्क्रिय करना था। इस दिशा में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। बस्तर संभाग के लगभग 99 फीसदी इलाके को आईईडी मुक्त कर दिया गया है, जबकि शेष एक फीसदी क्षेत्र में भी सर्च और डी-माइनिंग अभियान लगातार जारी है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बचे हुए क्षेत्र में मुख्य रूप से अंतरराज्यीय सीमावर्ती इलाके, जिला सीमाएं, घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में अगले छह माह तक विशेष अभियान चलाकर आईईडी के खतरे को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास किया जाएगा।

पांच महीने में 278 आईईडी बरामद

वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में बस्तर रेंज में सुरक्षा बलों ने कुल 278 आईईडी बरामद किए हैं। वहीं इस दौरान केवल 9 विस्फोट की घटनाएं सामने आई हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सुरक्षाबलों की रणनीति और सतर्कता के चलते नक्सलियों के मंसूबों को लगातार नाकाम किया जा रहा है।

कर्रेगुट्टा अभियान में मिली थी बड़ी सफलता

बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सबसे लंबा 23 दिनों का ऑपरेशन चलाया गया था। इसी क्षेत्र से सबसे अधिक आईईडी बरामद किए गए थे। वर्षों तक नक्सल संगठन सुरक्षा बलों की गतिविधियों को बाधित करने और ग्रामीणों में भय का माहौल बनाने के लिए सड़कों, पगडंडियों और संभावित ऑपरेशन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विस्फोटक उपकरण लगाते रहे थे।

आधुनिक तकनीक से मिल रही सफलता

बस्तर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से आईईडी खतरे से निपटने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। इसके तहत नियमित रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) अभियान, बम निरोधक दस्तों की तैनाती, अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग, तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं के आधार पर विस्फोटकों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय किया जा रहा है।

आईजी सुंदरराज पी. ने दी जानकारी

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि माओवादी कैडरों द्वारा पूर्व में लगाए गए अधिकांश आईईडी को सफलतापूर्वक खोजकर निष्क्रिय किया जा चुका है। हालांकि पूरे क्षेत्र को पूर्ण रूप से आईईडी मुक्त घोषित करने से पहले व्यापक सर्च अभियान और सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। सुरक्षा बलों की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी विस्फोटक उपकरण छूट न जाए और नागरिकों व जवानों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित रहे।

मानसून में भी जारी रहेगा डी-माइनिंग अभियान

सुरक्षाबलों ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान और उसके बाद भी डी-माइनिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। इसका उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है जहां अभी भी आईईडी छिपे होने की आशंका है, ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया जा सके।

स्थानीय लोगों का मिल रहा सहयोग

सुरक्षा बलों का कहना है कि इस अभियान में स्थानीय लोगों का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी आईईडी और विस्फोटकों के कारण आवाजाही जोखिमपूर्ण थी, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों को गति मिल रही है। सुरक्षित वातावरण बनने से ग्रामीणों का विश्वास बढ़ा है और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आई है।

Published on:
19 Jun 2026 05:26 pm