
naxal news
Chhattisgarh Surrendered Naxal: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सरेंडर कर चुके पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर एक अनोखी पहल की जा रही है। जो लोग कभी नक्सल संगठन का हिस्सा थे, वे अब सामान्य जीवन जीने और परिवार बसाने की इच्छा रखते हैं। इसी उद्देश्य से जगदलपुर के महारानी अस्पताल में विशेष मेडिकल कैंप आयोजित किया गया है। यहां पूर्व माओवादियों की नसबंदी (वेसक्टॉमी) को रिवर्स करने की सर्जरी निशुल्क की जा रही है। इस पहल का मकसद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और सामान्य पारिवारिक जीवन जीने का अवसर देना है।
जानकारों के अनुसार, नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद कई पुरुष सदस्यों की नसबंदी करा दी जाती थी। इसका उद्देश्य संगठन के नियमों का पालन कराना बताया जाता था। लेकिन अब बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। सामान्य जीवन में लौटने के बाद वे शादी, परिवार और बच्चों के साथ नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह मेडिकल कैंप उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है।
इस विशेष अभियान में यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक रिवर्स वेसक्टॉमी एक जटिल माइक्रो सर्जरी होती है। निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन पर आमतौर पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च आता है, लेकिन इस कैंप में यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क दी जा रही है। सर्जरी के साथ मरीजों को जांच, दवाइयां और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल भी उपलब्ध कराई जा रही है।
महारानी अस्पताल में आयोजित यह विशेष कैंप दो चरणों में रखा गया है। पहला चरण 30 और 31 मई को पूरा हो चुका है। दूसरा चरण 13 और 14 जून को आयोजित होगा। डॉक्टरों की टीम का लक्ष्य करीब 60 से 65 पूर्व माओवादियों की सर्जरी करना है। अब तक 30 से अधिक सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सभी मरीज स्वस्थ हैं और ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से संपन्न हुए हैं।
सरकार और सामाजिक संस्थाओं का मानना है कि केवल आत्मसमर्पण कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूर्व नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य देना भी जरूरी है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी होने पर ही वे पूरी तरह मुख्यधारा से जुड़ पाते हैं। इसी सोच के तहत यह मेडिकल पहल शुरू की गई है, ताकि पूर्व नक्सली अपने परिवार के साथ सामान्य नागरिक की तरह जीवन जी सकें।
पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार की पुनर्वास नीति और विकास कार्यों के कारण कई लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में लौट रहे हैं। शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में रिवर्स वेसक्टॉमी कैंप सिर्फ एक मेडिकल कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन लोगों को नई पहचान और नया भविष्य देने की कोशिश भी है, जिन्होंने कभी संघर्ष और हिंसा से भरी जिंदगी जी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार और सामाजिक जुड़ाव किसी भी व्यक्ति को स्थिर जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बस्तर में चल रहा यह अभियान इसी सोच को मजबूत करता है। जिन लोगों ने कभी हथियारों के बीच जिंदगी बिताई, वे अब अपने बच्चों और परिवार के साथ सामान्य जीवन का सपना देख रहे हैं। यह पहल बताती है कि पुनर्वास केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि लोगों को नई उम्मीद और सम्मानजनक भविष्य देने का माध्यम भी बन सकता है।
Updated on:
01 Jun 2026 02:55 pm
Published on:
01 Jun 2026 02:52 pm
बड़ी खबरें
View Allबस्तर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
