
Bastar Seva Dera Model(photo-patrika)
Bastar Seva Dera Model: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर/बस्तर में नक्सलवाद के बाद विकास और सुरक्षा के नए मॉडल के रूप में ‘सेवा डेरा’ की शुरुआत की जा रही है। इसके तहत बस्तर संभाग के सभी 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से ‘सेवा डेरा’ में बदले जाने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, रोजगार और आजीविका के अवसरों से सीधे जोड़ना भी है। इससे क्षेत्र में विकास, विश्वास और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
डिप्टी सीएम एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने नेतानार पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने सेवा डेरा परिसर, सेवा सेतु केंद्र, बैंक सखी केंद्र और महिला स्व सहायता समूहों द्वारा संचालित गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं से बातचीत कर उनके कार्यों की सराहना की और कहा कि बस्तर की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 18 मई को बस्तर के नेतानार सीआरपीएफ कैंप पहुंचेंगे, जहां वे ‘सेवा डेरा’ मॉडल का लोकार्पण करेंगे। यह कार्यक्रम शहीद गुंडाधुर के नाम से जुड़े परिसर में आयोजित किया जाएगा। सरकार इसे “बदलते बस्तर” की नई तस्वीर के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी में है, जहां नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास और जनभागीदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अपने दौरे के दौरान अमित शाह शहीद गुंडाधुर की प्रतिमा स्थल पर भी जाएंगे और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। डिप्टी सीएम ने इस स्थल का निरीक्षण कर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सजावट को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह स्थान बस्तर के गौरव और जननायक गुंडाधुर की स्मृति से जुड़ा है, इसलिए इसकी व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित होनी चाहिए।
जगदलपुर के आसना स्थित बादल अकादमी में भी केंद्रीय गृहमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। डिप्टी सीएम विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और विधायक किरण सिंह देव ने स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।
अमित शाह के बस्तर दौरे के अगले दिन 19 मई को जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित होगी। इसमें छत्तीसगढ़ सहित चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। बैठक में आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती समन्वय, नक्सल उन्मूलन के बाद विकास योजनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
सरकार के अनुसार ‘सेवा डेरा’ मॉडल में सेवा सेतु केंद्र, बैंक सखी केंद्र और महिला स्व सहायता समूहों की गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को योजनाओं से सीधे जोड़ना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। नेतानार का सीआरपीएफ कैंप इस मॉडल का पहला केंद्र बनेगा, जिसके बाद इसे बस्तर संभाग के सभी कैंपों में लागू करने की योजना है।
सरकार इस पूरे दौरे और कार्यक्रम को नक्सल हिंसा से उबरकर “नए बस्तर” के रूप में पेश करने की तैयारी में है। यहां सुरक्षा के साथ-साथ विकास, विश्वास और जनभागीदारी को केंद्र में रखते हुए एक नई सामाजिक और प्रशासनिक संरचना विकसित करने का दावा किया जा रहा है।
Published on:
17 May 2026 12:31 pm
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