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World Cancer Day 2026: कैंसर से जंग लड़ रहा ये इलाका; 6 सालों में 9 की मौत: चीनी छोड़ने से ठीक होने के दावे में कितनी सच्चाई?

World Cancer Day 2026: चीन छोड़ने से कैंसर ठीक हो सकता है या नहीं? जानिए, इस दावे में कितनी सच्चाई है। साथ ही जानिए उस इलाके के बारे में जहां 6 सालों में कैंसर से 9 की मौत हो चुकी है।

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Feb 04, 2026
चीनी छोड़ने से कैंसर ठीक हो सकता है या नहीं? फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

World Cancer Day 2026: आज (4 फरवरी, बुधवार) विश्व कैंसर दिवस है। विश्व कैंसर दिवस पर आपको बताते हैं एक ऐसे गांव के बारे में जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ रहा है। इसके अलावा उस दावे की सच्चाई के बारे में भी आपको बताएंगे जिसमें ये कहा जा रहा है कि चीनी छोड़ने से कैंसर ठीक हो जाता है।

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UP News In Hindi: भैंसहिया गांव लड़ रहा कैंसर से जंग

दरअसल, उत्तर प्रदेश के बस्ती शहर से महज 4 किलोमीटर दूर सदर ब्लॉक का भैंसहिया गांव कैंसर से जंग लड़ रहा है। बाबा भदेश्वरनाथ धाम से सटे इस गांव में पिछले 6 सालों में 35 से 50 साल की उम्र के 9 लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं 3 लोग अभी भी इससे जूझ रहे हैं। इन 12 में से 5 महिलाएं और 7 पुरुष हैं।

Uttar Pradesh News In Hindi: क्या बोले गांव के प्रधान?

धूम्रपान,पान और गुटखा का सेवन करने वाले 5 लोगों में मुंह या गले का कैंसर था। इसके अलावा महिलाएं आंत और ब्लड कैंसर का शिकार हुईं। गौर करने वाली बात ये है कि मरीजों में कैंसर का पारिवारिक इतिहास भी नहीं रहा था। गांव के प्रधान शक्ति उपाध्याय उर्फ विक्की का के मुताबिक, उन्होंने कई बार पत्र लिखकर अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करवाने की कोशिश की लेकिन किसी अधिकारी ने इसका संज्ञान नहीं लिया।

Basti News in Hindi: प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने क्या कहा?

महर्षि वशिष्ठ स्वसाशी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय बस्ती के प्रधानाचार्य मनोज कुमार का कहना है कि पानी में आर्सेनिक की ज्यादा मात्रा होने से भी कैंसर होता है। उनका कहना है कि गांव में डॉक्टर्स की की विशेष टीम जाएगी। कैंसर से बचाव के लिए जो भी इंतजाम होंगे वहां कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को चाहिए कि वह देसी नल का पानी पीन से बचें। पानी को उबालकर रखने के बाद पानी पीएं।

Claims Of Cancer Recovery: चीनी छोड़ने से कैंसर ठीक होने के दावे में कितनी सच्चाई?

सोशल मीडिया पर तेजी से एक दावा वायरल हो रहा है जिसमें कहा जा रहा है कि चीनी बंद करने से कैंसर खुद खत्म हो जाएगा। ऐसे में कैंसर रोगियों और उनके परिवारजन के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। लखनऊ के एरा मेडिकल कॉलेज के डाक्टर्स ने वैज्ञानिक शोध पत्र रिव्यू आर्टिकल के जरिए इस दावे को खारिज कर दिया। विशेषज्ञों की माने तो उपवास या डाइट में बदलाव सहायक हो सकता है, लेकिन कैंसर के इलाज का विकल्प ये नहीं हो सकता।

world cancer day 2026: क्या कहता है शोध?

दरअसल, एरा मेडिकल कॉलेज और रूस, स्लोवाकिया और इराक के विशेषज्ञों द्वारा किया गया शोध अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल "क्योरस" में मार्च 2025 में प्रकाशित हुआ था। जिसमें मुताबिक, उपवास करने से शरीर में मेटाबालिज्म में बदलाव आता है, जिससे कुछ प्रकार की कैंसर कोशिकाओं की संवेदनशीलता बढ़ सकती हैं। यह कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसे पारंपरिक इलाज को थोड़ा ज्यादा प्रभावी बना सकता है, लेकिन उपवास या चीनी छोड़ देना अकेले कैंसर का इलाज हो ही नहीं सकता है। कैंसर विशेषज्ञों ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रहे इस प्रकार के दावे झूठे और भ्रामक हैं।

शोध में शामिल विशेषज्ञों के नाम-

डॉ. गिजल फातिमा, डॉ. अब्बास महदी, डॉक्टर. अमर महदी (एरा मेडिकल कालेज), डॉक्टर. जान फेडाको (स्लोवाकिया), डॉक्टर. नजाह हादी (इराक) और डॉक्टर. अमिनात मागोमेदोवा (मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी, रूस)।

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