बेमेतरा

छत्तीसगढ़ का वो मंदिर, जो 1300 साल से समेटे है कल्चुरी वैभव की कहानी, देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु

1300 Year Old Temple: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित नवागढ़ का प्राचीन शमी गणेश मंदिर आस्था के साथ-साथ प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत को भी अपने भीतर समेटे हुए है।
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Sep 14, 2026
Chhattisgarh News
1300 साल पुराना गणेश मंदिर (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Shami Ganesh Temple: बेमेतरा जिले के नवागढ़ में स्थित सिद्ध श्री गणेश मंदिर आस्था के साथ छत्तीसगढ़ की प्राचीन स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। सालभर यहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां मांगी गई मनोकामना गणेशजी पूरी करते हैं। सामने स्थित प्राचीन शमी वृक्ष के कारण इसे श्री शमी गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। क्षेत्र में माता महामाया का प्राचीन मंदिर, बगीचे, तालाब-बावली और अनेक मंदिरों के अवशेष उस काल की समृद्ध व्यवस्था को दर्शाते हैं।

छत्तीसगढ़ में कल्चुरी शासन को स्वर्णकाल माना जाता है। उनकी राजधानी क्रमश: तुम्मान, रतनपुर, खल्लारी और रईपुर रही। डॉ. दीवान बताते हैं कि जब राजधानी रतनपुर थी, तब प्रशासनिक कार्य वहीं से होते थे, जबकि सैन्य छावनी शिवनाथ नदी के दक्षिण में लगभग अठारह किलोमीटर दूर मांडव या मारो में थी, ताकि विशाल भू-भाग में सैन्य पहुंच सुगम हो सके।

गोंड राजाओं के काल में निर्माण

इतिहासकार डॉ. बसुबंधु दीवान के अनुसार नवागढ़ का यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उनके शोध के मुताबिक मंदिर का निर्माण संभवत: संवत् 704 यानी करीब 647 ईस्वी में गोड़ राजाओं के काल में हुआ था। मंदिर के सामने स्थित शमी वृक्ष को भी उसी काल का माना जाता है। इसका उल्लेख गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित कल्याण पत्रिका में मिलने की बात कही जाती है।

अष्टकोणीय मंदिर और प्राचीन कुआं

श्री खेड़ापति जी का यह प्राचीन मंदिर उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली में निर्मित है। इसकी सबसे खास विशेषता इसकी अष्टकोणीय संरचना है। मंदिर परिसर में ईंटों से बारीकी से निर्मित अष्टकोणीय कुआं भी मौजूद है। यहां एक प्राचीन शिलालेख मिलने की जानकारी है, जिसके प्राकृत लिपि में होने की संभावना जताई गई है।डॉ. दीवान के अनुसार कल्चुरी काल में नवागढ़ ८५ गांव वाले एक परगने का प्रमुख केंद्र था। यहां मिट्टी से निर्मित किले के अवशेष आज भी मौजूद हैं। माता महामाया का प्राचीन मंदिर, तालाब-बावली, बगीचे और अन्य मंदिरों के अवशेष इस क्षेत्र की तत्कालीन समृद्धि की कहानी कहते हैं।

मराठा काल में जीर्णोद्धार

मंदिर का समय-समय पर कई बार जीर्णोद्धार हुआ। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मराठा शासक बिम्बाजी भोंसले के आदेश पर मंदिर के कुछ हिस्सों का जीर्णोद्धार कराया गया था। ब्रिटिश काल में पुरातत्वविद् जे.डी. ब्लंट ने भी मंदिर का सर्वेक्षण कर इसकी ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित किया था। छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से कुछ वर्ष पहले मंदिर का पुन: जीर्णोद्धार कराया गया। आज यहां श्रद्धालुओं की आस्था और प्राचीन विरासत साथ-साथ दिखाई देती है। नवागढ़ के मंदिर और आसपास बिखरी प्राचीन मूर्तियां व स्थापत्य अवशेष इस क्षेत्र को पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं। इनके संरक्षण और व्यवस्थित अध्ययन की जरूरत है।

Updated on:
14 Sept 2026 01:49 pm
Published on:
14 Sept 2026 01:49 pm