
Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati: बेमेतरा जिले के ग्राम सलधा में उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का दिव्य चातुर्मास महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ जारी है। देउरगांव के ग्रामीणों ने पादुका पूजन किया। दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती ने शिवलिंग संस्थापकों के नामों की घोषणा की। धर्मसभा में शंकराचार्य ने घोषणा की कि सलधा तीर्थ में सवा लाख शिवलिंग स्थापित किए जा रहे हैं। इसलिए यहां मात्र 80 परिक्रमा करने से भक्तों को एक करोड़ परिक्रमा के बराबर महापुण्य प्राप्त होगा। शंकराचार्य ने शिव पुराण की महिमा भी बताई।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव परम कृपालु हैं और राह भटके जीव को भी शरण देते हैं। गुणनिधि की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जाने-अनजाने में की गई शिव सेवा और दीपदान से भी पाप नष्ट हो जाते हैं। शंकराचार्य ने भस्म को संसार का सार बताते हुए कहा कि शिव भक्ति में लीन व्यक्ति सूतक-पातक जैसे दोषों से मुक्त हो जाता है। उन्होंने विभिन्न देवी-देवताओं की परिक्रमा के विधान के बारे में भी बताया। जैसे दुर्गा की एक और शिव की आधी परिक्रमा की जाती है। सलधा में सवा लाख शिवलिंगों की एक साथ स्थापना होने के कारण यहां की आधी परिक्रमा भी सवा लाख परिक्रमा के तुल्य हो जाती है। इस गणना के अनुसार 80 बार परिक्रमा करने पर सीधे एक करोड़ परिक्रमा का फल प्राप्त होता है।
शंकराचार्य (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati) ने स्पष्ट किया कि शास्त्रोक्त आठ प्रकार की मूर्तियों में मिट्टी से निर्मित शिवलिंग को सर्वाधिक श्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने कहा कि यही शिवलिंग निर्माण की सही प्रक्रिया है।
अयोध्या धाम से पधारे संतोष दुबे ने राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष का स्मरण कराते हुए शंकराचार्य से अयोध्या में आश्रम स्थापित करने का आग्रह किया। चातुर्मास के दौरान शंकराचार्य का प्रतिदिन सत्संग और प्रवचन होता है, जिसमें श्रद्धालु धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं। पं. दुबे के आग्रह को शंकराचार्य ने तन्मयता से सुना। इस दौरान उन्होंने अयोध्या में आश्रम स्थापित करने के प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया।