
Chhattisgarh Workers Protest: ग्राम मुड़पार संबलपुर में बालाजी पावर एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड प्लांट में कार्यरत श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा था। मजदूरों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी, रात्रि पाली भत्ता, स्वास्थ्य सुविधाएं, महिला-पुरुष मजदूरों के लिए समान सुविधाएं, जर्जर बेडरूम/बैरक की मरम्मत, टॉयलेट की सुविधा, बीमारी की छुट्टी में कटौती न करना, स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता सहित कई मांग शामिल थी।
ज्ञापन पर बड़ी संख्या में मजदूरों के हस्ताक्षर थे। इसके बाद सोमवार को समाज सेवक प्रिंस देहरे की अगुवाई में सुबह आठ बजे से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उद्योग के खिलाफ अपनी मांगो को लेकर आंदोलन शुरू कर दिए। लगभग नौ घंटे तक चले आंदोलन के बाद प्रबंधन ने एक पत्र जारी किया है इसकी पुष्टि पत्रिका नहीं करता लेकिन मजदूरों कि हक के लिए सडक़ पर उतरे प्रिंस देहरे ने बताया कि माह में चार अवकाश, मजदूरी दर में इजाफा, चिकित्सा सुविधा सहित कुछ मांग प्रबंधन ने मान ली है। कुछ मांग जिस पर संदेह है उसमें मंगलवार को साफ-साफ जानकारी प्रबंधन के द्वारा देने की बात कही गई है।
प्रबंधन केजारी पत्र में कहा गया है सभी कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दिया जा रहा है और आगे भी इसका पालन किया जायेगा। सभी कर्मचारियों के लिये प्लांट में उचित पानी और शौचालय की व्यवस्था की गई है। यदि कर्मचारियों को लगता है कि व्यवस्था को और बढ़ाया जाये तो प्रबंधन द्वारा निरीक्षण कर व्यवस्था को और अच्छी प्रबंध किया जायेगा। सभी कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित छुट्टी प्रबंधन द्वारा समयानुसार दिया जायेगा।
बालाजी प्रबंधन योग्यता के अनुसार लोकल युवाओं को प्लांट में प्राथमिकता के अनुसार शुरू से ही नियुक्ति दे रहा है और भविष्य में भी नियुक्ति देते रहेगा। बालाजी प्रबंधन सभी कर्मचारियों के लिये डब्ल्यूसी पॉलिसी कराकर रखा है और कंपनी में चिकित्सा व्यवस्था की सुविधा भी है। प्रबंधन ने आज्शासन दिया है कि कंपनी द्वारा कर्मचारियों के लिये अच्छे नीति नियमों का पालन किया जा रहा है और भविष्य में और अच्छे नीति नियम लागू किये जाएंगे जिससे सभी को बेहतर सुविधा मिल सके।
वर्ष 2023 में जब उद्योग लगाने के पूर्व जन सुनवाई हुई तो भाजपा नेताओ ने जमकर विरोध किया था। गांव गांव चोपाल लगाया था। उद्योग शुरू होने के बाद किसी की प्रतिक्रिया नहीं आई है। जन सुनवाई में कांग्रेस से जुड़े लोग फायदे गिना रहें थे। आज युवा कांग्रेस से जुड़े लोग कायदा बता रहे हैं। जन सुनवाई के समय संस्था कुछ और था उद्योग फिलहाल किसी और के पास है।