विधायक स्वेच्छा अनुदान चेक के मामले में निलंबित साजा तहसील कार्यालय के बाबू ने कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि बड़े अधिकारी को बचाने के लिए उसे बलि का बकरा बनाया गया है।
बेमेतरा. विधायक स्वेच्छा अनुदान चेक के मामले में निलंबित साजा तहसील कार्यालय के बाबू ने कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि बड़े अधिकारी को बचाने के लिए उसे बलि का बकरा बनाया गया है। जबकि इस चेक से उसका कोई लेना-देना नही हैं। चेक तहसीलदार के हस्ताक्षर से जारी होता है। ऐसे में मुझ पर हुई कार्रवाई सरासर अन्याय है।
कलेक्टर पर फोड़ा ठींकरा
इधर साजा तहसीलदार तरूण खरे ने कुछ भी बोलने से मना करते हुए सारा ठींकरा कलेक्टर महादेव कावरे पर फोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि कलेक्टर कावरे के कहने पर चेक जारी हुआ है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव आचार संहिता के दौरान साजा विधानसभा में विधायक स्वेच्छानुदान चेक बांटने का मामला सामने आया था। जिसमे कलेक्टर कावरे ने साजा तहसील कार्यालय के बाबू शरद वर्मा को निलंबित करते हुए एसडीएम कार्यालय में अटैच किया है।
जबकि जिम्मेदार तहसीलदार को नोटिस थमाकर खानापूर्ति कर ली गईं। अब तहसीलदार सारा मामला कलेक्टर पर डालकर पल्ला झाडऩे में लगा हुआ है। कांग्रेस के द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी महादेव कावरे ने जांच में शिकायत को सही पाते हुए तहसील कार्यालय के बाबू को निलंबित कर दिया। अब इस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए क्योकि चेक जारी करने वाले अधिकारी पर कोई कार्रवाई नही हुई है।
तहसीलदार ने कार्यालय छोड़ा
पत्रिका टीम इस मामले की पड़ताल को लेकर साजा तहसील कार्यालय पहुंची। यहां इस संबंध में तहसीलदार खरे से सवाल करने पर वे असहज हो उठे और कलेक्टर पर बात डालकर कार्यालय से निकल गए। इसके विपरीत निलंबित बाबू वर्मा बड़ी सहजता से जवाब देते हुए सारे मामले की विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि करे कोई और भरे कोई। इस मामले से उनके शासकीय सेवा में दाग लग गया है। इससे मैं और मेरा पूरा परिवार काफी आहत है।
भृत्य ने तहसीलदार को दिए थे 20 चेक बुक
बाबू शरद वर्मा ने बताया कि कार्यालय के भृत्य प्रकाश परगनिहा ने बैंक ऑफ बड़ौदा से 1 अक्टूबर को 20 चेक बुक लाकर तहसीलदार के पास छोड़ा था। बैंक के सीसीटीवी फुटेज से इसकी पुष्टि की जा सकती है। कलेक्टर कार्यालय से 4 अक्टूबर हितग्राहियों की सूची जारी हुई। इसके बाद तहसीलदार कार्यालय से 6 अक्टूबर को उसके पास पहुंची। जबकि स्वेच्छानुदान के सारे चेक 5 अक्टूबर के पहले तहसील कार्यालय से जारी हो गए।
हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की जांच से होगा खुलासा
बाबू वर्मा ने बताया कि उसके द्वारा एक भी चेक नहीं भरा गया है। तहसीलदार के खाते में आचार संहिता के लगने के 3 दिन बाद 9 अक्टूबर को 23 लाख 71 हजार रुपए जमा कराए गए। चेक की हैंडराइटिंग को एक्सपर्ट से कार्यालय के संबंधित कर्मचारियो की राइटिंग से मिलान करने पर सारे मामला का खुलासा हो जाएगा और चेक भरने वाले कर्मी का नाम उजागर होगा।
कार्यकर्ताओं को बांटे जा रहे चेक
पत्रिका टीम की पड़ताल में खुलासा हुआ कि 6 अक्टूबर से पहले विधायक स्वेच्छानुदान के सारे चेक बाबू के पास पहुंचने से पहले तहसीलदार के हस्ताक्षर के बाद संबंधित प्रतिनिधि को पहुंचा दिए गए। यहां से उस पार्टी के कार्यकर्ताओं को बांटे जा रहे थे। आचार संहिता लगने के बाद कुछ ग्रामीण चेक लेकर बैंक पहुंचे। तब कहीं जाकर इस मामले का खुलासा हुआ। जानकारी के अनुसार साजा तहसील कार्यालय से स्वेच्छानुदान के 800 चेक जारी हुए हैं।
सीधी बात, महादेव कावरे कलेक्टर, बेमेतरा
Q इस मामले में साजा तहसील के बाबू ने कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं?
A प्रथम दृष्टया उन पर मामला बनता है, इसलिए उसे निलंबित किया गया है।
Q बाबू ने कहा उसने एक भी चेक नहीं भरा, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच कराकर पुष्टि करने की बात कही है?
A जरूरत पडऩे पर हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से भी जांच कराएंगे।
Q तहसीलदार के हस्ताक्षर से जारी हुए हैं बिना तारीख के सारे चेक?
A कार्रवाई नहीं थमी हैं, इसमें जो दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी।
Q मामले में तहसीलदार सारा ठींकरा आप पर फोड़कर जवाब देने से बच रहे हैं?
A मैंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है। वे बेफिजूल की बात कर रहे हैं, क्योंकि ऐसा कोई भी आदेश नोटशीप में अनुमोदन के बाद जारी होता है।