स्टेट बजट से बनने वाले बायपास के लिए पहले चरण के सर्वे का काम पूरा, गुनरबोड़ उपजेल के पास से शुरू होकर लोलेसरा में नेशनल हाइवे पर होगी समाप्त
बेमेतरा . बेमेतरा शहर के लिए बहुप्रतीक्षित बायपास रोड के लिए का सर्वे का काम शुरु कर दिया गया है। पीडब्लूडी एवं राजस्व अमले द्वारा प्रथम चरण का सर्वे पूरा कर लिया गया है। प्रस्तावित बायपास रोड बेमेतरा से सिमगा मार्ग में गुनरबोड़ उपजेल के पास से प्रारंभ होकर लगभग 7 गांव की सीमा से गुजरते हुए लोलेसरा मेला स्थल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग में समाप्त होगी। सर्वे के पश्चात राजस्व विभाग के द्वारा प्रभावित किसानों की कृषि भूमि एवं शासकीय भूमि की रिपोर्ट तैयार किए जाने की जानकारी मिली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रस्तावित बायपास रोड बेमेतरा से सिमगा मार्ग में ग्राम गुनरबोड़ स्थित उपजेल के पास से प्रारंभ होकर ग्राम बीजाभाट, फरी, खिलोरा, कंतेली, जहाजपुर, गांगपुर होते हुए लोलेसरा की सीमा में पहुंचकर मेला स्थल के नेशनल हाइवे में जाकर मिलेगी।
40 फीसदी निजी भूमि होगी प्रभावित
शासन के मंशानुरुप बायपास के लिए प्रस्तावित रोड में किसानों की निजी जमीनें ज्यादा प्रभावित न हो और प्रस्तावित रोड बसाहट से भी दूर हो इसका ध्यान रखते हुए सर्वे किया गया है। सर्वे के अनुसार प्रस्तावित बायपास में लगभग 35 से 40 प्रतिशत निजी भूमि प्रभावित हो रही है। वहीं 60 से 65 प्रतिशत शासकीय भूमि आ रही है। प्रस्तावित बायपास रोड की चौड़ाई 36 मीटर होगी। सर्वे में राजस्व विभाग के द्वारा सड़क की चौड़ाई के अनुसार कितने किसानों की कितनी जमीनें प्रभावित होगी, उनका सर्वे का काम प्रगति पर है। बायपास के लिए प्रस्तावित रोड में प्रभावित होने वाले निजी भूमि को अधिग्रहित करने से पहले किसानों से सहमति ली जाएगी। साथ ही प्रभावित किसानों को जमीन अधिग्रहण के बाद शासन के दरों के अनुसार मुआवजा भी दिया जाएगा।
बायपास सड़क बन जाने शहर में हो रहे दुर्घटनाओं पर विराम लगने की है उम्मीद
शहर के लिए काफी लंबे समय से बायपास रोड की मांग की जा रही थी। बायपास के लिए सर्वे किए जाने से लोगों ने राहत महसूस किया है। बताना होगा कि शहर में बायपास नहीं होने से शहर के बीचो-बीच गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग में सड़क दुर्घटनाएं काफी बढ़ गई है। शहर के अंदर से भारी वाहनों के आवाजाही के चलते लोग दहशत में जी रहे थे। शहर के अंदर भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें दर्जनों लोग अपनी जान गवां चुके हैं। वहीं सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। बेमेतरा जिला बनने के बाद शहर में जिला मुख्यालय होने के चलते लोगों की आवाजाही में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में शहर के मध्य से भारी वाहनों के गुजरने से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
शहर में यातायात का दबाव होगा कम
बताना होगा कि जिला मुख्यालय होने की वजह से शहर में यातायात का भारी दबाव है। राज्य बजट से बनने वाले बायपास सड़क के बन जाने के बाद शहर में यातायात का दबाव कम होगा। इसके साथ-साथ भारी मालवाहक वाहनों का शहर में प्रवेश के बिना ही बाहर से निकासी हो सकेगा। बायपास निर्माण को लेकर जिलेभर के लोगों में उत्सुकता है। जानकार मानते हैं कि बायपास निर्माण होने की स्थिति में शहर में यातायात का दबाव कम होगा और वायु व ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा।
एक बायपास की प्रकिया अधूरी, अब नए बायपास से बंधी उम्मीद
नेशनल हाईवे 30 में पूर्व बायपास का निर्माण विवादास्पद रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास योजना के तहत शहर में नवागढ़ तिगड्डा से अशोका विहार के मध्य सड़क पर विकल्प के तौर पर एक बायपास सड़क स्वीकृत किया गया था। जिसमें केंद्र शासन द्वारा भूअर्जन की प्रकिया शुरू करते हुए प्रभावितों के लिए 126 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी। जिसमें प्रथम किस्त के तौर पर 35 करोड़ की राशि केन्द्र शासन द्वारा भूअर्जन के प्रभावितों के लिए अर्जन अधिकारी को जारी किया गया था। जिसमें से 14 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है। इसके बाद मुआवजा विवाद और अधिक दर पर मुआवजा वितरण के लिए आपत्ति किए जाने के बाद केन्द्रीय भूतल एवं परिवहन विभाग द्वारा अवार्ड परित किए जाने के बाद प्रकिया पर फिलहाल रोक लगा दिया गया है। जिसके बाद से जिला मुख्यालय में बनने वाले बायपास के लिए आज 30 माह से स्थिति तय नहीं हो पाया है। आज भी प्रकिया अधूरी है।
राशि स्वीकृति के लिए शासन को भेजेंगे प्रस्ताव
इस संबंध में बेमेतरा पीडब्ल्यूडी के ईई एमआर जाटव ने कहा कि नए बायपास के लिए प्रथम चरण के सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। मार्ग की लंबाई-चौड़ाई के हिसाब से एस्टीमेट, प्रभावित किसानों की निजी भूमि की रिपोर्ट एवं शासन दर पर मुआवजा राशि का निर्धारण कर बजट तैयार कर राशि स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।