
पुश्तैनी जमीन को बचाने लगा रहे गुहार(फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh News: बेमेतरा जिला मुख्यालय से न्याय के नाम पर मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जहां पारा 45 डिग्री के करीब पहुंच रहा है और लू के थपेड़े आम लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर रहे हैं, वहीं तहसील कार्यालय के सामने एक बुजुर्ग पिछले 8 दिनों से अन्न त्यागकर खुले आसमान के नीचे बैठा है। यह बुजुर्ग किसी सरकारी योजना का लाभ लेने नहीं, बल्कि अपनी उस पुश्तैनी जमीन को बचाने की गुहार लगा रहा है, जिसे सरकारी तंत्र ने एक झटके में शासकीय घोषित कर दिया है।
मामला बेमेतरा निवासी फारुख अली का है। उनके पास अपनी पैतृक भूमि के 100 साल पुराने दस्तावेज़ और वंशावली मौजूद है। दशकों से इस जमीन पर उनके परिवार का कब्जा और खेती रही है। लेकिन हाल ही में स्थानीय तहसीलदार ने एक विवादित आदेश जारी करते हुए इस निजी पैतृक भूमि को शासकीय घोषित कर दिया। फारुख अली का कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वजों की है और उनके पास इसके पुख्ता कानूनी प्रमाण हैं। बावजूद इसके, बिना किसी ठोस आधार और बिना उचित सुनवाई के तहसील प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन की सूची में डाल दिया।
पिछले 8 दिनों से फारुख अली तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हैं। इस भीषण गर्मी में जहां प्रशासन हीटवेव की एडवायजरी जारी कर रहा है, वहीं एक आंदोलनकारी बुजुर्ग के प्रति प्रशासन का रवैया बेहद क्रूर बना हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि प्रशासन ने बुजुर्ग को धूप से बचने के लिए टेंट लगाने तक की अनुमति नहीं दी है। यहां तक कि अपनी व्यथा सुनाने के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। पीड़ित बुजुर्ग ने सीधे तौर पर पटवारी और तहसीलदार पर विपक्षी पार्टी से सांठगांठ करने का आरोप लगाया है। फारुख अली का दावा है कि विपक्षी दल ने फर्जी नोटरी और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अपना दावा पेश किया। राजस्व अधिकारियों ने इन फर्जी दस्तावेजों की जांच करने के बजाय, उन्हें ही सही मानकर विपक्षी को संरक्षण देना शुरू कर दिया। जब पीड़ित ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई, तो उसे दरकिनार कर दिया गया और विपक्षी को जमीन पर निर्माण करने की मौन सहमति दे दी गई।
साबिर शेख, अनावेदक बेमेतरा के मुताबिक, आरोप बेबुनियाद है। जिस जमीन पर संबंधित विवाद कर रहा है वह जमीन मैं 8 वर्ष पूर्व उनसे खरीदी थी। जिसका संपूर्ण दस्तावेज मेरे पास है। बार-बार रजिस्ट्री के लिए कहने पर बहानेबाजी करता रहा। एक लाख देने पर ही रजिस्ट्री करूंगा यह कहकर टालमटोल करता रहा। आवेदक का तहसील व एसडीएम न्यायालय में प्रकरण खारिज हो चुका है।
अनिरुद्ध मिश्रा, तहसीलदार बेमेतरा के मुताबिक, आवेदक ने लगानी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत की थी। जांच में वह भूमि प्रचलित आबादी की पाई गई, इसलिए उनके प्रकरण को खारिज किया गया है।
Published on:
15 May 2026 06:29 pm
