जिले के स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए हर साल 35 लाख खर्च किया जाता है।
बेमेतरा. शासकीय हाई व हायर सेकंडरी स्कूल में पढऩे वाले विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर रखने की अनिवार्यता होने के बाद भी जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण हाईस्कूल स्तर के कक्षा में पढऩे वाले कक्षा नवमीं व दसवीं के विद्यार्थी फर्नीचर के अभाव में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। दूसरी तरफ जिले के स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए हर साल 35 लाख खर्च किया जाता है।
जिला कार्यालय से मात्र 14 किलोमीटर दूर ग्राम नरी की हालत खर्च की वास्तविकता बयां कर रही है। नए स्कूल भवन का अधूरा निर्माण होना पढऩे वालों पर भारी पडऩे लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार लोक निर्माण विभाग कार्यालय में गए पर विभाग के जिम्मेदारों ने गंभीरता नहीं दिखाई। शासन के निर्देशों के अनुसार सभी शासकीय स्कूलों में पढऩे वालों के लिए बैठने के लिए अनिवार्य रूप से टाट पटटी व फर्नीचर की व्यवस्था करना है।
जिले के सभी प्राथमिक स्कूलों में टाट पटटी, मिडिल, हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था करना है। जारी शैक्षिक सत्र में जिले के 88 हाईस्कूलों में फर्नीचर आपूर्ति के लिए 35 लाख रुपए का बजट तैयार किया गया है । इन स्कूलों में 44-44 स्कूल के अनुसार दो खेप में फर्नीचर सप्लाई किया जा रहा है। पहले खेप में जिन 44 स्कूलों को 40, 30 एवं 20 सेट फर्नीचर दिया गया है, उसमें बेमेतरा ब्लॉक के ग्राम नरी के शासकीय हाईस्कूल भी शामिल हैं।
जिस तरह से स्कूल में कक्षा 9 में पढऩे वाले 91 छात्र-छात्राएं व कक्षा दसवीं में पढऩे वाले 61 विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करना पड़ रहा है, उससे शिक्षा विभाग का दावा खोखला नजर आ रहा है। पूर्व जनपद सदस्य मोहन साहू ने बताया कि गांव के स्कूल में सुविधाओं का अभाव है। जिसके कारण पालक भी परेशान हंै। स्कूल की स्थिति को देखते हुए कई पालकों ने बच्चों को स्कूल भेजना तक बंद कर दिया है।
नरी स्कूल के लिए आरएमएस योजना के तहत 49 लाख 75 हजार की लागत से बनना था जिसके लिए बकायदा टेंडर जारी कर रायपुर के ठेकेदार को 20 अगस्त 2013 तक निर्माण करने के लिए ठेका दिया गया था । निर्माण पूरा करने की मियाद 12 दिसंबर तय किया गया था, लेकिन आज तक भवन का निर्माण नहीं हो पाया है। ग्रामीणों के अनुसार भवन में बिजली, पानी, दरवाजा तक नहीं लगाया गया है।
जिसके कारण भवन की स्थिति को देखते हुए कक्षाओं का लगाया जाना असंभव है। उमेन्द भारती, लोचन साहू, जनपद सदस्य कौशल सिन्हा, उपसरंपच मोहन साहू ने बताया कि कई बार ग्रामीण लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से मिलकर स्थिति से अवगत करा चुके हैं। सहायक संचालक, जिला शिक्षा कार्यालय एसके काठले ने बताया कि जिले के किसी भी हाई व हायर सेकंडरी स्कूल में फर्नीचर की कमी नहीं है। पर्याप्त आपूर्ति किया गया है।