भरोसे में आकर सिद्धार्थ ने अपने पिता से बात किया और रुपयों का इंतजाम होने पर किस्तों में भुगतान किया। बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, 11 अगस्त 2025 को यूपीआई के माध्यम से 90,000 रुपये भेजे गए। इसके बाद 25 अगस्त 2025 को बैंक के खाते से दो बार में 50,000 और 35,000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। शेष 2,00,000 रुपये की मांग करने पर, जब प्रार्थी ने मना किया तो आरोपी ने पहले दिए गए पैसे डूबने की धमकी दी। डर के मारे सिद्धार्थ ने 29 अक्टूबर 2025 को अपने पिता से उधार लेकर नकद राशि आरोपी को सौंप दी।