
अचानक दौड़कर आया बुजुर्ग और रोक दिया VIP काफिला (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh News: बेमेतरा जिले में रविवार को जमीन विवाद में प्रशासन की नाइंसाफी से नाराज पीड़ित राज्यपाल के काफिले के पीछे दौड़ने लगा। यह देखकर राज्यपाल ने संवेदनशीलता दिखाते हुए काफिला रूकवाया और बुजुर्ग से ऐसा करने का कारण पूछा। तब बुजुर्ग ने बताया कि उसका नाम फारूक अली है। वह बाजार पारा का रहने वाला है।
अपनी जमीन को बचाने के लिए वह बीते 13 दिनों से तहसील कार्यालय के पास भूख हड़ताल पर बैठा है। स्थानीय प्रशासन से उसे न्याय नहीं मिला तब उसने उनके काफिले के पीछे दौड़ लगाई ताकि अपनी परेशानी राज्यपाल को बता सके। फिलहाल राज्यपाल ने अली की व्यथा सुनकर उन्हें ढांढस बंधाते हुए मामले की जांच कराकर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
मामला बेमेतरा निवासी फारुख अली का है। उनके पास अपनी पैतृक भूमि के 100 साल पुराने दस्तावेज़ और वंशावली मौजूद है। दशकों से इस जमीन पर उनके परिवार का कब्जा और खेती रही है। लेकिन हाल ही में स्थानीय तहसीलदार ने एक विवादित आदेश जारी करते हुए इस निजी पैतृक भूमि को शासकीय घोषित कर दिया। फारुख अली का कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वजों की है और उनके पास इसके पुख्ता कानूनी प्रमाण हैं। बावजूद इसके, बिना किसी ठोस आधार और बिना उचित सुनवाई के तहसील प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन की सूची में डाल दिया।
पिछले 8 दिनों से फारुख अली तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हैं। इस भीषण गर्मी में जहां प्रशासन हीटवेव की एडवायजरी जारी कर रहा है, वहीं एक आंदोलनकारी बुजुर्ग के प्रति प्रशासन का रवैया बेहद क्रूर बना हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि प्रशासन ने बुजुर्ग को धूप से बचने के लिए टेंट लगाने तक की अनुमति नहीं दी है। यहां तक कि अपनी व्यथा सुनाने के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। पीड़ित बुजुर्ग ने सीधे तौर पर पटवारी और तहसीलदार पर विपक्षी पार्टी से सांठगांठ करने का आरोप लगाया है। फारुख अली का दावा है कि विपक्षी दल ने फर्जी नोटरी और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अपना दावा पेश किया। राजस्व अधिकारियों ने इन फर्जी दस्तावेजों की जांच करने के बजाय, उन्हें ही सही मानकर विपक्षी को संरक्षण देना शुरू कर दिया। जब पीड़ित ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई, तो उसे दरकिनार कर दिया गया और विपक्षी को जमीन पर निर्माण करने की मौन सहमति दे दी गई।
Published on:
18 May 2026 06:05 pm
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