हडग़ांव के 10 किसान 80 एकड़ में कर रहे बोआई, कैंसर, थायराइड, शुगर, सिकल सेल, एनिमिया, विटामिन-डी की कमी में है फायदेमंद
बेमेतरा. काला चावल के औषधि गुणों को देखते हुए जिले के बेरला विकासखण्ड के ग्राम हडग़ांव में 10 किसान लगभग 80 एकड़ में खेती कर रहे है। कैंसर, थायराइड, शुगर, सिकल सेल, एनिमिया, विटामिन-डी की कमी से होने वाले रोगों से में फायदेमंद साबित होने वाले काले चावल की जैविक खेती कृषि विभाग की आत्मा योजना के जरिए की जा रही है।
काला चावल में होते हैं औषधि गुण
हडग़ांव निवासी किसान आरडी पटेल ने काले चावल की मांग को देखते हुए महासमुंद के किसान डॉ. सेन से काले चावल की खेती का गुर सीखने के बाद कृषि विभाग से संपर्क किया। कृषि विभाग ने आत्मा योजना के साथ प्रदर्शन घटक में हडग़ांव ग्राम के अन्य 9 किसानों को काले चावल की खेती के लिए तैयार किया. 20 किलो प्रति एकड़ बीज दर के साथ काला चावल का बीज प्राप्त कर 80 एकड़ में रोपाई की गई।
नीचे काला और ऊपर हरा होता है पौधा
काला चावल का पौधा नीचे काला और ऊपर हरा होता है। चावल पूर्ण रूप से काला होता है और पकने के बाद भी चावल काला और गीला रहता है। किसानों ने धान को 2600 रुपए क्विंटल में बेचने के लिए इकरार नामा किया है। इसका उत्पादन 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ होना बताया गया है। जिले में पहली बार हो रहे काले चावल की खेती का अवलोकन करने ग्राम हडग़ांव में उप संचालक कृषि, शशांक शिन्दे पहुंचे थे।
120 से 130 दिन में फसल होगी तैयार
फसल का अवलोकन कर कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि किस्म 120 से 130 दिन में पक कर तैयार होता है, साथ ही जैविक खाद एवं जैविक दवाई का प्रयोग किया जा रहा है। जैविक खाद के लिए आत्मा योजना से सहायता दी जा रही है। इसका उत्पादन प्रदेश के धमतरी, महासमुंद, दन्तेवाड़ा में किसानों द्वारा किया जा रहा है। चावल को अन्य देशों में भी निर्यात किया जाता है।
जैविक खेती को दे रहे प्रोत्साहन
इस वर्ष जिले में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने काला चावल के अलावा बासमती, जवाफूल, विष्णु भोग का उत्पादन किसानों द्वारा किया जा रहा हैं। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु विभाग द्वारा कृषकों को बैठक, प्रशिक्षण व संपर्क के माध्यम से अवगत कराया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी राजकुमार सोलंकी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी आरके वर्मा, कृषक पटेल और अन्य किसान उपस्थित थे।