
Bemetara Murder Case: पत्नी की हत्या कर शव को जलाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश करने वाले पति को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। बेमेतरा के सत्र न्यायाधीश सरोजनंद दास की अदालत ने आरोपी दुर्गेश कुमार विश्वकर्मा को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक शिव गोपाल श्रीवास ने प्रभावी पैरवी की।
करीब तीन वर्ष पहले हुई इस सनसनीखेज घटना में विवाहित महिला गंगोत्री का शव उसके ही घर के बाथरूम में जली हुई अवस्था में मिला था। शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना गया, लेकिन पुलिस की गहन जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा कर दिया।
यह घटना बेमेतरा जिले के ग्राम फरी की है। अभियोजन के अनुसार, 3-4 जनवरी की रात गंगोत्री अपने पति दुर्गेश कुमार विश्वकर्मा और मासूम बच्चे के साथ घर के कमरे में सो रही थी। देर रात करीब 3 से 3:30 बजे बच्चे के रोने की आवाज सुनकर उसकी सास की नींद खुली। जब परिजनों ने गंगोत्री को कमरे में नहीं पाया तो उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान बाथरूम से धुआं निकलता दिखाई दिया। दरवाजा खोलने पर गंगोत्री का शव जली हुई अवस्था में मिला। घटनास्थल पर मिट्टी के तेल का डिब्बा और माचिस भी रखी थी, जिससे प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हुआ। इसके बाद परिजनों ने बेमेतरा थाना पुलिस को सूचना दी।
मामले की जांच के दौरान चिकित्सीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने पूरी कहानी बदल दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि महिला की मौत आग लगने से पहले ही हो चुकी थी। यानी शव को बाद में जलाया गया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना वाली रात पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। विवाद के दौरान गुस्से में आरोपी दुर्गेश कुमार विश्वकर्मा ने गंगोत्री का मुंह और नाक दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद अपराध छिपाने और आत्महत्या का रूप देने के उद्देश्य से शव को बाथरूम में ले जाकर उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के घटना के समय पहने हुए कपड़े जब्त किए। फॉरेंसिक जांच में उन कपड़ों पर मिट्टी के तेल के अवशेष पाए गए। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ मजबूत सबूत पेश किए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में सभी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर यह साबित किया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से पत्नी की हत्या की और बाद में सबूत मिटाने का प्रयास किया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों पर विचार करने के बाद सत्र न्यायाधीश सरोजनंद दास ने आरोपी दुर्गेश कुमार विश्वकर्मा को भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषी ठहराया। अदालत ने उसे आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई तथा अर्थदंड भी लगाया। अदालत के इस फैसले को अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों की सफलता बताते हुए कहा कि मजबूत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को उसके अपराध की कड़ी सजा दिलाई गई।