
Aditya Hridaya Stotra : सूर्यदेव नवग्रहों में राजा माने जाते हैं। राजा होने के कारण सूर्य देव जीवन में राज-काज से संबंधित सभी चीजों के कारक होते हैं। सभी राजकीय कार्यों, सरकार में उच्च पद, सरकारी नौकरियों आदि के साथ ही प्राइवेट में उच्च नौकरियां भी सूर्य देव की कृपा से ही प्राप्त होती हैं। कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी होने पर सरकार से संबंधित कार्य में सफलता मिलती है, सरकारी नौकरी मिल सकती है। मान सम्मान और यश मिलता है। जिनका सूर्य कमजोर हो, उन्हें रोज या विशेष तौर पर रविवार को सूर्य देव को जल अर्पित कर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे यश- प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। रावण पर विजय प्राप्ति के लिए श्रीराम ने भी आदित्य हृदय स्तोत्र से सूर्यदेव की स्तुति की थी।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि सूर्यदेव की प्रसन्नता के लिए रविवार को उनकी पूजा जरूर करनी चाहिए। इस दिन नमक नहीं खाएं और व्रत भी रखें। विधि विधान से सूर्य उपासना करनेवालों को जीवन में सफलता जरूर मिलती है। राजनीतिक पद और सरकारी कामकाज तो सूर्यदेव के आशीर्वाद से ही मिल सकते हैं। शासन तंत्र का हिस्सा बनने के लिए, सरकारी कामकाज पूरा कराने के लिए सूर्य आराधना सर्वोत्तम मानी गई है।
सरकारी पद के साथ ही जीवन में मानसम्मान भी सूर्यदेव के कारण ही मिलता है। ज्योतिष शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि यश—प्रतिष्ठा के कारक भी सूर्य देव ही हैं। यदि सबकुछ होते हुए भी आपको जीवन में यथेष्ट मानसम्मान प्राप्त नहीं हो रहा हो तो सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करना जरूरी है। इसके लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके के अनुसार संभव हो तो शुक्ल पक्ष के पहले रविवार ब्रहृममुहूर्त में उठकर स्नान कर इसे शुरू करें। सुबह सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पाठ करना शुरु करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ तीन बार करें। इसमें करीब आधा घंटा लगेगा। नियमित रूप से किया गया यह पाठ चमत्कारिक परिणाम देता है।