भरतपुर

Atar Singh Bhadana Death: आखिर Ex-MLA अतर सिंह भड़ाना पर किसने और क्यों किया जानलेवा हमला, जानिए मौत के पीछे की इनसाइड स्टोरी

Rajasthan Bharatpur News : भरतपुर के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड की इनसाइड स्टोरी। क्रेशर प्लांट विवाद, 70-80 लोगों की भीड़ और माइनिंग संघर्ष का पूरा सच जानिए।
3 min read
• •
Oct 12, 2026
atar singh badana murder mystery police investigation bharatpur
पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की जानलेवा हमले के बाद मौत

राजस्थान के भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत की यह पूरी कहानी महज़ एक अचानक हुआ हादसा नहीं है, बल्कि यह माइनिंग, स्थानीय रसूख और ग्रामीणों के बीच लंबे समय से सुलग रहे गंभीर आक्रोश की एक बड़ी और डरावनी कहानी है। पूर्वी राजस्थान के इस चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे प्रशासनिक अमले और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आखिर किन परिस्थितियों में एक पूर्व विधायक को अपनी जान गंवानी पड़ी और इस खूनी संघर्ष के पीछे की असली वजह क्या थी, इसकी पूरी परतें अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।

इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले कौन थे और यह विवाद इतना कब और कैसे बढ़ा, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर कई बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस हिंसक झड़प के पीछे असल साजिश किसकी थी?

किसने किया हमला? 70 से 80 लोगों की उग्र भीड़ का धावा!

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 की शाम को हुई, जब भरतपुर के वैर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भौंडा और रायपुर गांव के करीब 70 से 80 स्थानीय ग्रामीण और अज्ञात लोग लाठी-डंडों, पत्थरों और घातक हथियारों से लैस होकर क्रेशर प्लांट पर अचानक आ धमके। क्रेशर से सटी पहाड़ी पर जब मशीनों के जरिए खनन का काम चल रहा था, तब पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना वहीं मौजूद थे।

उग्र भीड़ ने वहां पहुंचते ही सीधा हमला बोल दिया और पूर्व विधायक तथा उनके निजी सुरक्षाकर्मी (बॉडीगार्ड) गगन शर्मा को बुरी तरह घेरकर ताबड़तोड़ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस हिंसक हमले के बीच भीड़ की तरफ से फायरिंग भी की गई, जिसमें अतर सिंह भड़ाना को गोली लगी। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद गोली लगने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है और इसे मेडिकल रिपोर्ट तथा जांच का विषय बताया है।

क्यों हुआ यह खूनी संघर्ष? क्या है 2 साल पुराना माइनिंग विवाद?

इस पूरे खूनी संघर्ष की मुख्य जड़ माइनिंग लीज (खनन पट्टा) और क्रेशर प्लांट के संचालन का रास्ता है, जो पिछले काफी समय से विवादों में था। वैर थाना पुलिस के मुताबिक, यह कोई रातों-रात उपजा विवाद नहीं है, बल्कि भौंडा और रायपुर गांव के ग्रामीणों तथा क्रेशर संचालक (पूर्व विधायक के परिवार) के बीच पिछले करीब 2 वर्षों से तनाव का दौर चल रहा था।

यह माइनिंग लीज पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना के नाम पर आवंटित थी। स्थानीय ग्रामीणों का लंबे समय से यह आरोप था कि इस क्रेशर और माइनिंग गतिविधियों के कारण उनके पारंपरिक रास्ते बंद हो रहे हैं, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और गांवों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

इसी मांग को लेकर ग्रामीण पिछले दो साल से लगातार धरने और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार की शाम को जब प्लांट पर दोबारा खनन कार्य और मशीनें सुचारू की गईं, तो लंबे समय से सुलग रहा ग्रामीणों का गुस्सा अचानक ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा और मामूली कहासुनी कुछ ही मिनटों में हिंसक झड़प में बदल गई।

पुलिस की भूमिका और इंटेलिजेंस फेलियर!

इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जब लगभग एक घंटे तक क्रेशर प्लांट और भौंडा गांव के बीच भारी बवाल और तनाव का माहौल बना रहा, तब सूचना मिलने के बाद वैर थाना पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल पूर्व विधायक और उनके सुरक्षाकर्मी को संभालकर वैर के उपजिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर रेफर किया गया था।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि चूंकि यह माइनिंग विवाद पिछले दो वर्षों से चल रहा था और ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे थे, तो स्थानीय खुफिया तंत्र (इंटेलिजेंस) और पुलिस को इस बात का अंदेशा क्यों नहीं हुआ कि यहां कभी भी बड़ा टकराव हो सकता है? रविवार को जब विवादित प्लांट पर काम शुरू हुआ, तब वहां पुलिस बल की मौजूदगी का न होना प्रशासनिक ढिलाई को साफ तौर पर दर्शाता है।

भारी पुलिस बल तैनात और ताबड़तोड़ दबिश

पूर्व विधायक की मौत की दुखद खबर जैसे ही भरतपुर संभाग और उनके गृह क्षेत्र में पहुंची, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और भारी तनाव का माहौल बन गया। किसी भी तरह की जातीय, सामाजिक या राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए।

भौंडा गांव, क्रेशर साइट और स्थानीय अस्पतालों के आसपास भारी संख्या में पुलिस जाब्ता और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भरतपुर मुख्यालय से अतिरिक्त त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और विशेष पुलिस फोर्स को वैर भेजा गया है। पुलिस अब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हमलावर ग्रामीणों की पहचान करने में जुटी है तथा मुख्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

Updated on:
12 Oct 2026 11:19 am
Published on:
12 Oct 2026 07:45 am